उत्तराखंड के महान रचनाकार और राजनीतिज्ञ थे डॉ.भक्तदर्शन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड के प्रसिद्ध रचनाकार और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ.भक्तदर्शन पर आयोजित सेमिनार में उपस्थितों ने

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड के प्रसिद्ध रचनाकार और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ.भक्तदर्शन पर आयोजित सेमिनार में उपस्थितों ने उन्हें याद करते हुए उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि धर्मेंद्र उनियाल ने कहा कि डॉ.भक्तदर्शन साधारण परिवार से उठकर असाधारण प्रतिभा के धनी बने। सिद्धांतों के पक्के,संवेदनशील और जागरूक पत्रकार थे। वे पवित्र सोच वाले राजनीतिज्ञ और प्रखर वक्ता भी थे। उन्होंने बताया कि अधिक उम्र के कारण उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया, लेकिन उनका जीवन हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना। उनियाल ने कहा कि ऐसे ईमानदार और सिद्धांतप्रिय व्यक्ति राजनीति में बहुत कम देखने को मिलते हैं। डॉ.भक्तदर्शन ने अपनी पूरी जिंदगी किराये के मकान में बिताई,फिर भी उनकी प्रतिभा और कर्मशीलता ने उन्हें पूरे देश में प्रतिष्ठित बना दिया। उन्होंने पौड़ी गढ़वाल की पट्टी सांवली के भौराड़ गांव में 12 फरवरी 1912 को जन्म लिया। जन्म के समय उनका नाम राजदर्शन रखा गया था,लेकिन उन्हें यह नाम गुलामी का प्रतीक प्रतीत हुआ,इसलिए उन्होंने इसे बदलकर भक्तदर्शन रख लिया। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान उनका संपर्क रवींद्रनाथ टैगोर और हजारी प्रसाद द्विवेदी से हुआ। यहीं से वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हुए और 1930 में नमक आंदोलन के दौरान पहली बार जेल गए। इसके बाद कई बार उन्हें जेल की यात्रा करनी पड़ी। उन्होंने पत्रकार और संपादक के रूप में पत्रकारिता को नए आयाम दिए और कई पुस्तकों की रचना तथा अनुवाद किया। 1952 में उन्हें पहली बार पौड़ी गढ़वाल सीट से सांसद चुना गया और इसके बाद लगातार चार बार सांसद बने। उनकी कार्यशैली और जनसेवा की प्रतिबद्धता ने उन्हें उत्तराखंड और देशभर में विशिष्ट पहचान दिलाई। हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के संयोजक डॉ.वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में उत्तराखंड के दिवंगत रचनाकार डॉ.भक्तदर्शन को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस बार का हिंदी पखवाड़ा विशेष रूप से उनके जीवन,लेखन और सामाजिक योगदान पर केंद्रित है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों,शिक्षकों और साहित्यकारों ने भाग लिया। सभी ने डॉ.भक्तदर्शन के आदर्शों और रचनाओं को याद करते हुए उनके योगदान को सराहा और उनकी जीवनगाथा से प्रेरणा लेने की बात कही।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...