हिन्दी पखवाड़े की स्पर्धाओं के विजेताओं को दिए पुरस्कार

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित 11 स्पर्धाओं के बच्चों को समापन कार्यक्रम में पुरस्कार दिये गये। मुख्य अतिथि के

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित 11 स्पर्धाओं के बच्चों को समापन कार्यक्रम में पुरस्कार दिये गये। मुख्य अतिथि के रूप में श्रीनगर नगर निगम की मेयर आरती भण्डारी,सारस्वत अतिथि रूप में देवप्रयाग विकास खण्ड के प्रमुख विनोद बिष्ट तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में घनसाली नगर पंचायत के अध्यक्ष आनंद सिंह बिष्ट ने छात्रों को पुरस्कृत किया। आनंद बिष्ट ने छात्रों को संस्कृत में स्वच्छता की प्रतिज्ञा भी दिलाई। श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में 1 सितंबर को आरंभ हुए हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्ग,श्रुतलेख,हिंदी भाषा सामान्य ज्ञान,आशुभाषण,कहानी लेखन इत्यादि स्पर्धाएं हुईं। साथ ही राष्ट्रीय संगोष्ठी,डॉ.भक्तदर्शन पर व्याख्यान और छात्रों के लिए युवा कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया था। इनमें 167 बच्चों ने भाग लिया। श्री रघुनाथ बालगुरुकुलम् की कक्षा-6 के बच्चों के लिए आयोजित श्रुतलेख प्रतियोगिता में वंशिका प्रथम,रितिका द्वितीय,गौरव सेमवाल तृतीय और देविका चतुर्थ रही। इसी विद्यालय की कक्षा-9 के छात्रों की श्रुतलेख स्पर्धा में रचित शक्टा प्रथम,राघवेंद्र चतुर्वेदी द्वितीय,सूर्यांश तृतीय और तनुश्री चतुर्थ रहीं। प्राक्शास्त्री प्रथम की श्रुतलेख स्पर्धा में शुभम ममगाईं प्रथम,दिव्यांशु जोशी द्वितीय,इंशिका तृतीय और पार्थ पाराशर चतुर्थ रहे। प्राक्शास्त्री द्वितीय की पाठ आधारित स्पर्धा में गीतांजलि प्रथम,नीरज द्वितीय,आस्तिक तृतीय और आयुष नौटियाल चतुर्थ रहे। बीएससी योग विज्ञान की श्रुतलेख स्पर्धा में कात्यायनी प्रथम,मुस्कान द्वितीय,सिद्धि नवानी तृतीय और यशस्वी चौधरी चतुर्थ रहीं। शास्त्री प्रथम वर्ष की श्रुतलेख स्पर्धा में तनस्वी अत्री प्रथम,उन्नति रुहेला द्वितीय,दिव्यांशी बहुुुगुणा द्वितीय तथा रोहन डंगवाल चतुर्थ रहे। शास्त्री द्वितीय वर्ष की निबंध प्रतियोगिता में कशिश भट्ट प्रथम,आस्था महर द्वितीय,सागर कुमार और अखिलेश तृतीय तथा अंशुल और कीर्ति चतुर्थ रहे। शास्त्री तृतीय वर्ष की हिंदी भाषा सामान्य ज्ञान स्पर्धा में गौरव पांडेय प्रथम,अमन भट्ट द्वितीय,विमलेश प्रसाद तृतीय तथा सुशील राजपूत चतुर्थ रहे। आचार्य तथा एसएससी योग विज्ञान की आशुभाषण स्पर्धा में आकांक्षा प्रथम तथा ऋषभ पाठक द्वितीय रहे। छात्रों को पुरस्कार देते हुए मुख्य अतिथि आरती भण्डारी ने कहा कि संस्कृत के क्षेत्र में भविष्य उज्ज्वल है। संस्कृत ही एक ऐसी भाषा है,जिसे आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस का भय नहीं है,क्योंकि यह भाषा वैज्ञानिक है। उन्होंने कहा कि हिंदी पूरे देश में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में एक है। यह भारतीय जनजीवन में रच-बस गई है। इसका स्थान अंग्रेजी कभी नहीं ले सकती है,क्योंकि यह हमारे भावों,हदृय और मन से जुड़ी हुई है। यह हमारी संस्कृति का प्रतीक और हमारी प्रमुख संपर्क भाषा है। सारस्वत अतिथि देवप्रयाग के प्रमुख विनोद बिष्ट ने कहा कि हिंदी में अभिव्यक्ति में अन्य भाषाओं की अपेक्षा अधिक स्पष्टता है। यह भाषा शाब्दिक आधार पर समृद्ध है। संस्कृत के बाद आज विश्व में हिंदी ही है,जो गुणों के आधार पर श्रेष्ठ है और इसका मुकाबला कोई भी भाषा नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी पढ़ने में कुछ लोग शान महसूस करते हों,लेकिन उनकी आत्मा भी अवश्य स्वीकारती होगी कि हिंदी को अपनाने में ही श्रेष्ठता है। विशिष्ट अतिथि घनसाली नगर पंचायत के अध्यक्ष आनंद सिंह बिष्ट ने कहा कि अंग्रेजी हिंदी का महत्त्व पूरे देश में है ही,विश्व में भी यह एक नंबर की भाषा बन गई है। इस भाषा में अंग्रेजी की तरह न तो शब्दों की दरिद्रता है और न ही अक्षरों या उच्चारण को लेकर कोई भ्रम है। रिश्तों से लेकर फलों तक के हिंदी में अनेक नाम हैं,जबकि अंग्रेजी इस मामले में बहुत पीछे है। इस अवसर पर बिष्ट ने समस्त विद्यार्थियों और परिसर अध्यापकों को शपथ दिलाई कि वे अपने आसपास के पर्यावरण को स्वच्छ रखेंगे। इससे पहले हिंदी पखवाड़ा के संयोजक डॉ.वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस बार युवा कवि सम्मेलन और कहानी लेखन स्पर्धा दो नये प्रयोग किये गये। इनमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। उन्होंने कहा कि इन दोनो कार्यक्रमों में भाग लेने वाले बच्चों को वे अपना हिंदी कहानी संग्रह फागुणी निःशुल्क प्रदान करेंगे। अध्यक्षता करते हुए सह निदेशिका प्रो.चंद्रकला आर.कोंडी ने कहा कि देश के हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह हिंदी से प्रेम करे। यह भाषा हमारे राष्ट्र का गौरव है। यह संस्कृत में निहित हमारे ज्ञान को आम भारतीय तक पहुंचाने में सहायक बनी है। कार्यक्रम के आरंभ पर परिसर की ओर से अतिथियों का स्वागत किया गया। छात्रों ने वेद मंत्रों और गढ़वाली में सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का आरंभ किया। डॉ.ब्रह्मानंद मिश्र ने सभी का स्वागत किया। कु.पायल पाठक ने धन्यवाद किया। संचालन ज्योति शर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ.सुमिति सैनी,डॉ.अरविंद सिंह गौर,डॉ.सोमेश बहुगुणा,डॉ.मनीष शर्मा,रजत गौतम छेत्री,अंकुर वत्स आदि उपस्थित थे। अंत में निदेशक प्रो.पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने सभी अतिथियों को विदा किया।

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