विश्व ओजोन दिवस पर एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के बीजीआर कैम्पस पौड़ी में जन्तु विज्ञान विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के बीजीआर कैम्पस पौड़ी गढ़वाल के जन्तु विज्ञान विभाग की Zoological Society द्वारा मंगलवार को विश्व ओज़ोन दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के बीजीआर कैम्पस पौड़ी गढ़वाल के जन्तु विज्ञान विभाग की Zoological Society द्वारा मंगलवार को विश्व ओज़ोन दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष का अंतरराष्ट्रीय थीम From Science to Global Action विज्ञान से वैश्विक पहल तक रहा,जिसके अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण और ओज़ोन परत की सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ कैम्पस निदेशक एवं मुख्य अतिथि प्रो.यू.सी.गरौला के प्रेरक उद्बोधन से हुआ। उन्होंने ओज़ोन परत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह परत पृथ्वी पर जीवन के लिए सुरक्षा कवच की तरह है,जिसे बचाने के लिए हम सबको जागरूक और जिम्मेदार बनना होगा। विभागाध्यक्ष प्रो.सी.बी.कोटनाला ने अपने परिचयात्मक भाषण में ओज़ोन परत से जुड़ी समस्याओं और बढ़ते प्रदूषण के खतरे पर चिंता जताई। प्रो.ए.के.डोबरियाल ने जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों पर प्रकाश डाला। प्रो.वी.पी.बलोदी ने ओजोन परत संरक्षण हेतु चल रहे वैश्विक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की अहमियत बताई। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अमन शर्मा ने ओजोन परत के क्षरण के वैज्ञानिक कारणों और उसके मानव स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से समझाया। वहीं अजेंद्र सिंह गेस्ट फैकल्टी ने पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके ओजोन पर पड़ रहे प्रभावों पर चर्चा करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए आज ठोस कदम उठाने होंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत भाषण एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। छात्रों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए आकर्षक पोस्टर्स और विचारशील प्रस्तुतियों के माध्यम से ओज़ोन परत संरक्षण का संदेश दिया। जागरूकता कार्यक्रम के दौरान वियना कन्वेंशन,मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और किगाली अमेंडमेंट पर भी विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने इन अंतरराष्ट्रीय समझौतों की ऐतिहासिक और वैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार वैश्विक सहयोग से ओज़ोन परत के संरक्षण में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। कार्यक्रम का समापन ओजोन परत को बचाने के उपायों पर संवाद के साथ हुआ। सभी वक्ताओं ने विद्यार्थियों और समाज से अपील की कि प्रदूषण नियंत्रण,ऊर्जा की बचत और सतत विकास की दिशा में व्यक्तिगत योगदान देकर ही पृथ्वी को सुरक्षित रखा जा सकता है। इस अवसर पर जन्तु विज्ञान विभाग के संकाय सदस्यों,शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं समाज को ओजोन परत की वैश्विक महत्ता,अंतरराष्ट्रीय प्रयासों और पर्यावरण संरक्षण में व्यक्तिगत जिम्मेदारी के महत्व से अवगत कराना रहा।

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