
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विभाग और ऋषिकेश योगपीठ के मध्य हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) ने योग शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए द्वार खोल दिए हैं। इस एमओयू के आधार पर ऋषिकेश योगपीठ को अब गढ़वाल विश्वविद्यालय का एक्सटेंशन सेंटर घोषित किया गया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की जानकारी भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने शनिवार को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर साझा की,जिसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल है। यह पहल पूर्व कुलपति प्रो.अन्नपूर्णा नौटियाल के नेतृत्व में साकार हुई थी। उनका उद्देश्य न केवल विद्यार्थियों और शोधार्थियों को योग की व्यवहारिक शिक्षा देना था,बल्कि विदेशी छात्र-छात्राओं को भी भारत की पौराणिक योग पद्धति से जोड़ना था। एमओयू के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि भारतीय योग विज्ञान को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिले। गढ़वाल विश्वविद्यालय का योग विभाग बीते पांच वर्षों से नियमित रूप से मासिक योग प्रशिक्षण कार्यक्रम और योग कार्यशालाओं का आयोजन करता आ रहा है। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा के अनुसार अब तक कुल 44 बैच एक माह का योग प्रशिक्षण सफलता पूर्वक पूरा कर चुके हैं। इनमें 68 देशों के 315 विद्यार्थी सम्मिलित हुए हैं। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और सशक्त करती है। इस केंद्र की गतिविधियों के संचालन में ऋषिकेश योगपीठ के निदेशक दिगम्बर नौटियाल का विशेष सहयोग रहा है। वहीं गढ़वाल विश्वविद्यालय की ओर से डॉ.विनोद नौटियाल,डॉ.रजनी नौटियाल,विभागाध्यक्ष डॉ.अनुजा रावत तथा अन्य शिक्षकगण इस कार्य को निरंतर गति प्रदान कर रहे हैं। एमओयू के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को विश्वास है कि इस सहयोग से न केवल विद्यार्थियों में योग के प्रति व्यवहारिक दक्षता बढ़ेगी,बल्कि योग के वैज्ञानिक और चिकित्सा पक्ष पर भी गहन शोध को प्रोत्साहन मिलेगा। गढ़वाल विश्वविद्यालय और ऋषिकेश योगपीठ का यह साझा प्रयास भारतीय योग परंपरा को विश्व पटल पर और अधिक प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए न केवल स्वस्थ जीवनशैली की प्रेरणा बनेगी,बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी अमरत्व प्रदान करेगी।