
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। समाज सेवा और शिक्षा उन्नयन की दिशा में निरंतर सक्रिय हिमालय साहित्य एवं कला परिषद श्रीनगर ने आज दिनांक 20 सितम्बर 2025 को राजकीय इंटर कॉलेज बरसूड़ी जनपद रुद्रप्रयाग में एक सराहनीय पहल की। संस्था की ओर से जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क स्कूली बैग वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान परिषद के संस्थापक एवं मुख्य संरक्षक,श्रीनगर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी,प्रो.उमा मैठाणी तथा डॉ.प्रकाश चमोली ने बच्चों को बैग प्रदान किए। इस अवसर पर विद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया,उन्हें शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं अभिभावकों की ओर से अतिथियों का माल्यार्पण कर हार्दिक अभिनंदन किया गया। संस्था के संस्थापकों ने इस अवसर पर बच्चों और समाज के लिए अपने विचार साझा किए कृष्णा नंद मैठाणी ने अपने संबोधन में कहा कि हमारा प्रयास है कि हर बच्चा शिक्षा के अवसर से वंचित न रहे,जरूरतमंदों की मदद ही समाज सेवा का सच्चा मार्ग है। प्रो.उमा मैठाणी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा हर बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है,हमें बच्चों को उनके उज्जवल भविष्य की ओर मार्गदर्शन करना चाहिए। डॉ.प्रकाश चमोली ने कहा एक छोटा सहयोग भी किसी के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है,समाज के कमजोर तबके को सशक्त बनाना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर विद्यालय परिवार और अभिभावकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामयी बना दिया। उपस्थित जनों में कुलदीप बुटोला,सर्वदमन त्रिपाठी,शिशपाल सिंह रावत,भजनपाल सिंह,देवेंद्र सिंह रावत,संतोष नेगी,देवेंद्र सिंह,सुमन कठैत,रेणु सेमवाल,मंजू गोस्वामी,प्रियंका भट्ट,नेहा मैठाणी,हर्षवर्धन सिंह नेगी सहित अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं अभिभावक शामिल रहे। बच्चों के चेहरों पर खुशी की मुस्कान और आंखों में भविष्य की नई आशा ने पूरे आयोजन को मानवीय और भावनात्मक स्पर्श प्रदान किया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि छोटी-सी मदद भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। हिमालय साहित्य एवं कला परिषद समय-समय पर साहित्यिक गोष्ठियों के साथ ही सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करती रही है। संस्था का उद्देश्य निर्धन,पिछड़े और जरूरतमंद परिवारों को सहयोग प्रदान करना तथा शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में नई रोशनी फैलाना है। कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश गूंजता रहा कि जरूरतमंद की मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है,और शिक्षा सबसे सुंदर उपहार।