
हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। भारत सरकार के पूर्व सचिव एवं योजना आयोग भारत सरकार के वरिष्ठतम सलाहकार रहे डॉ.कमल टावरी ने आज नई सोच और अभिनव दृष्टिकोण के साथ ग्रामीण भारत को बदलने का संदेश दिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की परिकल्पना की जा सकती है,तो क्यों न गांवों को ही स्मार्ट गांव के रूप में विकसित किया जाए। डॉ.टावरी का मानना है कि गांव ही भारत की असली ताकत हैं। यदि गांवों में ही रोजगार पूरक अवसर,स्वरोजगार आधारित उद्योग और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो ग्रामीण युवाओं को शहरों की ओर पलायन करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। इसी दृष्टिकोण से डॉ.टावरी ने अतिरिक्त कार्य नियोजन आयोग का गठन किया है,जो सरकारों को लोक-आधारित नीतिगत सलाह देगा। इस आयोग के उत्तराखंड प्रभार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रगति एसोसिएशन देहरादून के समाजसेवी डी.एस.नेगी को सौंपी गई है। उन्हें उत्तराखंड का उप प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति की जानकारी डॉ.अरविंद दरमोड़ा ने साझा की। डॉ.टावरी ने ग्रामीण विकास के लिए एक अभिनव जीपीएस प्रणाली का खाका भी प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार-जी (G) का अर्थ है-गांव,गाय,ग्रामोद्योग,गरीब,गंगा,गौरी,गणतंत्र। पी (P) का अर्थ है-पब्लिक,प्राइवेट,पंचायत,परोपकारी,प्रगतिशील,पेड़,पानी,पेट,पर्यावरण। एस (S) का अर्थ है-स्वाभिमानी,स्वावलंबी,स्वरोजगारी। उनका कहना है कि यह जीपीएस मॉडल भारत के गांवों में ग्राम स्वराज और पर्यावरण पूरक स्वरोजगार की नींव रख सकता है। डॉ.टावरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ग्रामीण नियोजन ही असली परिवर्तन की दिशा है। कच्चे माल की मैपिंग,मार्केटिंग और योग्य लोगों का अभिनंदन करके हम गांवों में स्वाभिमानी और स्वावलंबी समाज बना सकते हैं। उन्होंने डॉ.अरविंद दरमोड़ा और डी.एस.नेगी से अपील की कि वे उत्तराखंड में ऐसे सभी लोगों की सूची तैयार करें,जो पर्यावरण पूरक स्वरोजगार और आजीविका से जुड़े कार्य कर रहे हैं। इस सूची को आगे सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा,ताकि नीतियों में ग्रामीण जनता की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। समाजसेवी डी.एस.नेगी की नियुक्ति से उत्तराखंड में ग्रामीण विकास के नए अवसर खुलने की संभावना है। नेगी लंबे समय से सामाजिक कार्यों और प्रगतिशील सोच के लिए जाने जाते हैं। उनकी यह जिम्मेदारी निश्चित रूप से प्रदेश में स्वरोजगार,पर्यावरण संरक्षण और गांव आधारित विकास को गति देगी।