हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के बीजीआर परिसर पौड़ी में प्राणी विज्ञान विभाग में बायोलॉजिकल कंजर्वेशन प्राइडे कार्यक्रम आयोजित

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के बीजीआर परिसर पौड़ी के प्राणी विज्ञान विभाग और जूलॉजिकल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में विश्व वन्यजीव सप्ताह 2025 के अवसर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के बीजीआर परिसर पौड़ी के प्राणी विज्ञान विभाग और जूलॉजिकल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में विश्व वन्यजीव सप्ताह 2025 के अवसर पर दो दिवसीय प्रेरणा सप्ताह एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ 7 अक्टूबर को हुआ,जिसमें पोस्टर प्रतियोगिता और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्रों ने वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन प्राइडे-इकोरेस्टो इन पीपल एंड नेचर विषय पर शानदार अभिव्यक्तियां दी। प्रतिभागियों ने मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व,प्रकृति संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के विविध पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। 8 अक्टूबर को आयोजित मुख्य संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक प्रो.पी.बी.बड़ोनी,प्रो.यू.सी.गैरोला,पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.ए.के.डोबरियाल,प्राणी विज्ञानी प्रो.एम.एस.बिष्ट सहित विभागाध्यक्ष प्रो.सी.बी.कोटनाला एवं अन्य विशेषज्ञों ने वन्यजीवों के संरक्षण,पर्यावरणीय संतुलन एवं उत्तराखंड की जैव विविधता पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ताओं ने वन्यजीवों की घटती संख्या,मानवजनित चुनौतियां और आधुनिक विकास के दबाव के बीच संरक्षण की प्राथमिकता पर गहन चर्चा की। प्रो.पी.बी.बड़ोनी ने कहा कि वन्यजीव केवल पारिस्थितिकी का हिस्सा नहीं,बल्कि मानव जीवन के अस्तित्व की आधारशिला हैं। इनके बिना प्रकृति का संतुलन असंभव है। प्रो.यू.सी.गैरोला ने उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य का पर्वतीय भूभाग अनोखे वन्यजीवों का आश्रय स्थल है,जिसे संवेदनशील नीति और सामुदायिक सहयोग से सुरक्षित रखना आवश्यक है। प्रो.ए.के.डोभाल ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 एवं 2022 के संशोधनों पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि नये प्रावधानों से संरक्षण कार्य को नई दिशा मिली है। वहीं प्रो.एम.एस.बिष्ट ने मानव-वन्यजीव संघर्ष और जन-जागरूकता की भूमिका पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। समापन सत्र में प्रो.बी.बी.कोटनाला ने वन्यजीव संरक्षण के सांस्कृतिक और पारंपरिक पहलुओं को रेखांकित किया। इस अवसर पर सहायक प्रोफेसर अमन कुमार शर्मा जूलॉजिकल सोसायटी के डिजाइनर ने वोट फॉर वाइल्डलाइफ थीम पर वन्यजीव संरक्षण एवं उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की। कार्यक्रम के दौरान आयोजित वन्यजीव फोटोग्राफी प्रतियोगिता में छात्रों द्वारा खींची गई मनमोहक तस्वीरों ने सबका ध्यान आकर्षित किया। समापन सत्र में प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए गए और विजेताओं को सम्मानित किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो.बी.बी.कोटनाला ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल अकादमिक दृष्टि से उपयोगी हैं,बल्कि युवाओं में पर्यावरणीय संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना को भी प्रबल करते हैं। कार्यक्रम का संचालन सुमन बिष्ट ने किया और धन्यवाद ज्ञापन के साथ समापन हुआ।सभी प्रतिभागियों ने वन्यजीव संरक्षण,पर्यावरण संतुलन एवं सतत विकास की दिशा में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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