
हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर के समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग में मंगलवार को पर्वतीय विकास शोध केंद्र और प्रकृति पर्यावरण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में स्व.मोहन सिंह रावत गांववासी स्मृति व्याख्यानमाला-2025 का आयोजन किया गया। यह व्याख्यानमाला पर्वतीय समाज,जल संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक सार्थक विमर्श का रूप लेती नजर। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता,पर्यावरण कार्यकर्ता एवं विभिन्न जनजागरण अभियानों के प्रणेता श्री द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने अपने प्रभावशाली वक्तव्य में कहा जल ही सृजन करता है और जल ही प्रलय। यदि हम समय रहते जल संकट के समाधान के लिए आगे नहीं आए,तो यह संकट हमारे अस्तित्व को ही डुबो देगा। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण के प्रति चेतना जगाने हेतु जाड़ी संस्थान द्वारा वर्ष 2021 में कल के लिए जल अभियान प्रारंभ किया गया। इस अभियान के तहत आम और खास लोगों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों जैसे जन्मदिन,विवाह वर्षगांठ या प्रियजनों की स्मृति में जलकुंड और कच्चे तालाब बनवाकर उसे जीवन उत्सव के रूप में मनाएं। सेमवाल ने बताया कि इस अभियान से प्रेरित होकर उत्तरकाशी जनपद के चामकोट गांव के ग्रामीणों ने केवल दो वर्षों (2021-22) में 3500 से अधिक जलकुंड श्रमदान के माध्यम से बनाए,जिससे जल संरक्षण का एक अद्वितीय उदाहरण स्थापित हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2025 को जल वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और इसके अंतर्गत एक विद्यालय एक जल स्रोत कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। मुख्य वक्ता ने विभाग से आग्रह किया कि वह भी एक जल स्रोत को गोद लेकर उसका संरक्षण करे इस प्रस्ताव का उपस्थित जनों ने उत्साहपूर्वक समर्थन किया। इस अवसर पर समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.जे.पी.भट्ट,पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ.अरविंद दरमोड़ा एवं प्रो.किरण डंगवाल ने द्वारिका प्रसाद सेमवाल को स्मृति-चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।क्षप्रो.जे.पी.भट्ट ने कहा द्वारिका प्रसाद सेमवाल द्वारा किए जा रहे कार्य केवल प्रयोग नहीं,बल्कि समय की आवश्यकता हैं। उनके अभियानों से छात्रों को न केवल सीखने,बल्कि समाज से जुड़ने की प्रेरणा लेनी चाहिए। डॉ.अरविंद दरमोड़ा ने कहा कल के लिए जल अभियान के अंतर्गत श्रमदान से बनाए गए लाखों जलकुंडों का उल्लेख स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में किया था। यह गर्व की बात है कि यह प्रेरणा उत्तराखंड की धरती से निकली है। प्रो.किरण डंगवाल ने कहा कि उनका विभाग भी सेमवाल के आह्वान पर एक जल स्रोत गोद लेकर उसका संरक्षण एवं संवर्धन करने का कार्य करेगा। कार्यक्रम में सेव हिमालय मूवमेंट के अध्यक्ष समीर रतूड़ी ने हिमालय में हो रहे अंधाधुंध,अनियोजित निर्माण कार्यों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि हमने हिमालय की संवेदनशीलता को नहीं समझा,तो भविष्य में इससे होने वाले परिणाम अत्यंत भयावह हो सकते हैं। प्रकृति पर्यावरण संस्थान की बीना चौधरी को कार्यक्रम सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद दिया गया। इस अवसर पर प्रो. किरण डंगवाल,डॉ.किरण बाला,डॉ.नरेंद्र चौहान,प्रो.उमा बहुगुणा,डॉ.दिनेश,डॉ.हनुमंत,डॉ.ऋतु मिश्रा सहित समाज कार्य विभाग के समस्त शोधार्थी, छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन के एक शुभ अवसर पर एक जलकुंड बनाए,तो जल संकट का अंत संभव है। जल केवल साधन नहीं यह संस्कृति,जीवन और अस्तित्व का मूल है।