

हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पारम्परिक फसलों और उनसे बनने वाले औषधीय गुणों से भरपूर भोजन को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से समर्पित गढ़ भोज दिवस 2025 का मुख्य आयोजन मंगलवार को श्रीनगर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास परिसर में उत्साह,उल्लास और परम्परा के रंगों के बीच सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत एवं गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां,स्थानीय व्यंजनों की प्रदर्शनी तथा गढ़ भोज सम्मान 2025 जैसे अनेक आकर्षण शामिल रहे। मुख्य अतिथि डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि गढ़ भोज दिवस केवल भोजन संस्कृति का उत्सव नहीं,बल्कि उत्तराखंड की परम्परागत फसलों को आर्थिकी से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि जाड़ी संस्थान द्वारा संचालित गढ़भोज अभियान ने प्रदेश की जनता को मोटे अनाजों के महत्व से पुनः जोड़ा है। आज उत्तराखंड के पारम्परिक व्यंजन न केवल शादी-ब्याह और होटलों की थाली में परोसे जा रहे हैं,बल्कि यह हमारी पहचान बन चुके हैं। मंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा मंडुवे की खरीद 48.86 रुपये प्रति किलो के दर से की जा रही है,जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ही पौष्टिक आहार को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने जाड़ी संस्थान और गढ़भोज अभियान के प्रणेता द्वारिका प्रसाद सेमवाल के प्रयासों को सराहते हुए कहा कि इनकी दूरदृष्टि ने उत्तराखंड की थाली को विश्व पटल पर पहचान दिलाई है। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने भी उपस्थिति दर्ज कराते हुए कहा गढ़ भोज दिवस नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। उत्तराखंड का पारम्परिक भोजन केवल स्वाद ही नहीं,बल्कि औषधीय गुणों का भंडार है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने भी कहा कि इस तरह के आयोजन शोध एवं नवाचार के नए आयाम खोलते हैं। विश्वविद्यालय गढ़भोज पर आधारित अकादमिक अध्ययन को बढ़ावा देगा। गढ़भोज अभियान के प्रणेता द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा हमारे पारम्परिक व्यंजन केवल भोजन नहीं,बल्कि जीवन रक्षा की परम्परा हैं। हमारे भोजन में जलवायु परिवर्तन से लड़ने की क्षमता और रोग प्रतिरोधक शक्ति निहित है। गढ़भोज दिवस प्रकृति व परम्परा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। मुख्य आयोजन की जिम्मेदारी पर्वतीय विकास शोध केंद्र,मानव विज्ञान विभाग,समाजशास्त्र विभाग,एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर,राजकीय महाविद्यालयों के संविदा शिक्षक राजकीय महाविद्यालय (एच.एन.बी.से संबद्ध) तथा प्रगति एसोसिएट द्वारा संयुक्त रूप से निभाई गई। मुख्य आयोजक एवं पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ.अरविन्द दरमोड़ा ने कहा गढ़ भोज दिवस स्वस्थ समाज की कल्पना को साकार करने का प्रयास है। दुनिया में अब केवल पेट भरने वाले नहीं,बल्कि स्वास्थ्य बनाए रखने वाले भोजन की आवश्यकता है। हमें अपनी परम्परागत भोजन संस्कृति को बचाए रखना होगा यही गढ़ भोज का असली संदेश है। इस अवसर पर गढ़ भोज सम्मान 2025 से निम्न व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया विमल बहुगुणा प्रख्यात रंगकर्मी,प्रेम बल्लभ नैथानी सांस्कृतिक धरोहर संवाहक,गंगा असनोडा वरिष्ठ पत्रकार,सतेंद्र भंडारी समाजसेवी,अश्विन रावत खंड शिक्षा अधिकारी खिर्सू। कार्यक्रम में छात्रों द्वारा गढ़वाली,कुमाऊंनी और जौनसारी संस्कृति की झलक प्रस्तुत करने वाले आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। साथ ही चैसू,मंडुवे की पूरी,सट्टी का भात और छेमी की दाल जैसे पारम्परिक व्यंजनों की सुगंध और स्वाद ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में प्रो.यतीश वशिष्ठ,प्रो.मोहन पंवार,प्रो.किरण बाला,प्रो.किरण डंगवाल,प्रो.एच.बी.एस.चौहान,प्रो.जे.पी.भट्ट,प्रो.नरेंद्र चौहान,प्रो.प्यार सिंह राणा,डॉ.सुमन गुसाईं,डॉ.विक्रम बड़थ्वाल,डॉ.गिरिजा रतूड़ी,डॉ.मनोज सहित अनेक शिक्षक,शोधार्थी, छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। गढ़ भोज दिवस केवल एक आयोजन नहीं,बल्कि एक आंदोलन है जो हमें अपनी मिट्टी,फसलों,स्वाद और सेहत से पुनः जोड़ता है। यह पर्व बताता है कि आधुनिकता की दौड़ में भी अपनी जड़ों की ओर लौटना ही सच्ची प्रगति है।