
हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल के निर्देशन में सहकारिता मेला 2025 के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर एक विशेष विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर स्थान आवास विकास ग्राउंड श्रीनगर में आयोजित हुआ,जिसकी अध्यक्षता सिविल जज (जूनियर डिवीजन) कुमारी अलका अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति श्रीनगर ने की। शिविर का मुख्य उद्देश्य जनमानस को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व एवं संबंधित विधिक अधिकारों से परिचित कराना था। कुमारी अलका ने अपने संबोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 एक ऐतिहासिक और संवेदनशील कानून है,जो मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों को सम्मान,अधिकार और गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करने पर केंद्रित है। यह अधिनियम समाज में मानसिक रोग के प्रति धारणा बदलने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने अधिनियम 1987 और 2017 के प्रावधानों की तुलनात्मक व्याख्या करते हुए बताया कि कैसे नया कानून रोगियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण और पुनर्वास पर बल देता है। शिविर में उपस्थित डॉ.मोहित सैनी और डॉ.पार्थ दत्ता ने लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं जैसे-तनाव,अवसाद,चिंता और सामाजिक अलगाव के कारणों व समाधान पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल रोग का अभाव नहीं,बल्कि मन,मस्तिष्क और व्यवहार का संतुलन है। इस अवसर पर बार एसोसिएशन श्रीनगर के अध्यक्ष प्रमेश चंद्र जोशी ने कहा हर वर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है,जिसका उद्देश्य समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना और यह संदेश देना है कि स्वस्थ मन ही स्वस्थ शरीर का आधार है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की झिझक या संकोच न रखें,बल्कि इसे खुले मन से स्वीकारें और आवश्यक होने पर विशेषज्ञ की सहायता लें। वार एसोसिएशन के संरक्षक अनूप पांथरी,एमएस डॉ.राकेश रावत बेस चिकित्सालय श्रीकोट,डॉ.शुभम बंगवाल,डॉ.दीक्षा,एडवोकेट भूपेन्द्र पुंडीर,एडवोकेट विकास पंत ,चंद्रभानु तिवारी, बलवीर सिंह रौतेला,महासचिव ब्रह्मानंद भट्ट,नितेश भारती,सुधीर उनियाल,पूनम हटवाल,प्रीति बिष्ट,रोशनी देवी,प्रियंका रॉय,प्रकाश सिंह नेगी,मानव बिष्ट सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की शपथ एवं विधिक सहायता केंद्रों की जानकारी के साथ किया गया।