गढ़वाल विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय भूगोल सम्मेलन का हुआ भव्य शुभारंभ

श्रीनगर गढ़वाल। आज 25 अक्टूबर को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर के भूगोल विभाग की ओर से भारतीय भूगोलवेत्ता संस्थान आईआईजी का 46 वां वार्षिक अधिवेशन एवं परिवर्तनशील पृथ्वी,संवेदनशील पर्यावरण और जलवायु

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श्रीनगर गढ़वाल। आज 25 अक्टूबर को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर के भूगोल विभाग की ओर से भारतीय भूगोलवेत्ता संस्थान आईआईजी का 46 वां वार्षिक अधिवेशन एवं परिवर्तनशील पृथ्वी,संवेदनशील पर्यावरण और जलवायु अनुकूल समाजों की दिशा में मार्ग,विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शनिवार को स्वामी मनमंथन प्रेक्षागृह चौरास परिसर में भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत और पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ.अनिल जोशी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे प्रमुख भूगोलवेत्ता,पर्यावरणविद्,शिक्षाविद् और शोधार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि आज संपूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है। यह केवल वैज्ञानिकों का नहीं,बल्कि संपूर्ण मानवता का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास जो प्रकृति के विरोध में हो,वह आत्मविनाश का मार्ग है। उन्होंने घोषणा की कि गढ़वाल विश्वविद्यालय में शीघ्र ही आपदा प्रबंधन अध्ययन केंद्र खोला जाएगा,जहां शोधार्थी उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों,आपदाओं और पर्यावरणीय परिवर्तनों पर गहन अध्ययन कर सकेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में भू-सूचना प्रयोगशाला (जीएसआई लैब) की स्थापना हेतु प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है,जिसे वे शीघ्र ही केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ.जितेंद्र सिंह को भेजेंगे। उन्होंने कहा कि गढ़वाल विश्वविद्यालय उत्तराखंड की ज्ञान परंपरा का ध्वजवाहक है। यहां की धरती,संस्कृति और हिमालय का अध्ययन पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण निष्कर्ष दे सकता है। विशिष्ट अतिथि पद्मश्री पर्यावरणविद् डॉ.अनिल जोशी ने कहा कि विकास को नकारा नहीं जा सकता,लेकिन हमने अपने घर बनाने के लिए प्रकृति के घर उजाड़ दिए। यही कारण है कि पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हुआ है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी का तापमान निरंतर बढ़ रहा है,और इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव हिमालयी क्षेत्रों पर पड़ रहा है। यदि हम अब भी नहीं चेते,तो कल मैदानों की बारी है,उन्होंने आगाह किया। डॉ.जोशी ने पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रतिनिधि प्रो.एन.एस.पंवार ने कहा कि आईआईजी का यह सम्मेलन हिमालय संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी हमारी माता है,इसे स्वच्छ,संतुलित और सुरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है। भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष एवं सम्मेलन संयोजक प्रो.एम.एस.पंवार ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि इस स्तर का आयोजन गढ़वाल विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण है। सह संयोजक प्रो.एम.एस.नेगी ने सभी आगंतुकों,सहयोगियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत का एम्बुलेंस भेंट करने और आपदा केंद्र व प्रयोगशाला की घोषणा के लिए विशेष आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में आईआईजी अध्यक्ष प्रो.डी.के.नायक,महासचिव प्रो.रविंद्र जयभाई,पृथ्वी विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो.एच.सी.नैनवाल,चौरास परिसर निदेशक प्रो.आर.एस.नेगी,संगोष्ठी सचिव डॉ.राकेश सैनी,पूर्व अध्यक्ष प्रो.सच्चिदानंद सिन्हा,प्रो.बी.पी.नैथानी,वित्त अधिकारी डॉ.संजय ध्यानी,अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाईं,हैप्रेक निदेशक डॉ.विजयकांत पुरोहित,विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा,छात्रसंघ अध्यक्ष महिपाल बिष्ट सहित अनेक शिक्षाविद् उपस्थित रहे। देश-विदेश से पधारे ख्यातिप्राप्त भूगोलवेत्ताओं में दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ अध्यक्ष प्रो.वी.एस.नेगी,जामिया मिलिया से प्रो.ताहिर,प्रो.आर.बी.भगत,प्रो.बी.पी.सती,प्रो.एम.जागलान,प्रो.राजेश्वरी,प्रो.विमल कुमार,प्रो.सुधाकर,प्रो.अमित,प्रो.सचिन देवड़ा,प्रो.दीपक मिश्रा,प्रो.पद्मिनी,प्रो.मुरारी लाल,प्रो.शिव बत्रा,प्रो.सीमा जलान सहित कई अन्य प्रतिष्ठित विद्वान उपस्थित रहे। इस तीन दिवसीय सम्मेलन के माध्यम से भूगोल एवं पर्यावरण के क्षेत्र में नई शोध दिशाओं की शुरुआत होगी। हिमालयी पारिस्थितिकी,जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे मुद्दों पर गंभीर चिंतन से भविष्य की नीतियों को नई दिशा मिलेगी। यह आयोजन न केवल विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण है,बल्कि यह संदेश देता है कि जब तक मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन नहीं होगा-तब तक विकास अधूरा रहेगा।

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