परिवर्तनशील पृथ्वी पर चिंतन-गढ़वाल विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन भूगोल के शोधार्थियों ने रखा शोध-विचारों का अमूल्य भंडार

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमंथन प्रेक्षागृह में चल रही तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन आज ज्ञान,शोध और नवाचार

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमंथन प्रेक्षागृह में चल रही तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन आज ज्ञान,शोध और नवाचार का अद्भुत संगम देखने को मिला। परिवर्तनशील पृथ्वी,संवेदनशील पर्यावरण और जलवायु अनुकूल समाजों की दिशा में मार्ग विषय पर केंद्रित इस कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग एवं भारतीय भूगोलवेत्ता संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। दिन के प्रथम तकनीकी सत्र में प्रतिष्ठित प्रो.आर.दीक्षित यंग ज्योग्राफर अवार्ड के अंतर्गत सात युवा शोधार्थियों ने अपनी शोध प्रस्तुतियां दीं। इन शोध पत्रों में कृषि,ग्रामीण विकास,भूमि उपयोग,जलधारा प्रबंधन और पर्यटन जैसे विषयों पर नवीन दृष्टिकोणों को प्रस्तुत किया गया। इस सत्र में निर्णायक मंडल में प्रो.बी.एस.बुटोला,प्रो.राजेश्वरी एवं प्रो.विमल कुमार शामिल रहे,जबकि सत्र की अध्यक्षता प्रो.डी.के.नायक ने की और संचालन डॉ.सना रफी ने किया। 20 तकनीकी सत्रों में गूंजे शोध विचार-हिमालय से लेकर साइबर सुरक्षा तक रहे विषय केंद्र में कार्यशाला के दूसरे दिन कुल 20 तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ,जो विश्वविद्यालय परिसर के पांच अलग-अलग स्थलों पर एक साथ संपन्न हुए। इन सत्रों में देशभर के प्रख्यात भूगोलवेत्ताओं एवं शोधार्थियों ने निम्न विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हिमालय एवं ध्रुवीय पर्यावरण में परिवर्तन,भूमि कटाव,सूखा और बाढ़ प्रबंधन,जलवायु परिवर्तन एवं पर्वतीय पारिस्थितिकी,आवासीय समस्याएं और कार्बन प्रबंधन,प्रत्येक सत्र में विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के स्थानीय और वैश्विक प्रभावों पर चिंतन किया तथा समाज को अनुकूलन की दिशा में आगे बढ़ाने पर बल दिया। इन सत्रों की अध्यक्षता क्रमश-प्रो.एम.एस.जागलान,पो.सीमा जलान,प्रो.पद्मिनी,प्रो.सुचित्रा प्रदेश,प्रो.डी.के.मिश्रा,प्रो.वी.एस.नेगी एवं डॉ.आशुतोष ने की। सह-अध्यक्ष के रूप में डॉ.निधि सिंह,डॉ.सना रफी,डॉ.बर्ता री बारिक,डॉ.आर.डी.गायकवाड,डॉ.कविता मिश्रा,डॉ.जितेंद्र नेगी,डॉ.अतुल सैनी एवं डॉ.महेंद्र उपस्थित रहे। भूगोल विभाग ने किया अनुकरणीय आयोजन शोधार्थियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका-कार्यशाला की संपूर्ण रूपरेखा सह-आयोजक प्रो.एम.एस.पंवार,सह-संयोजक प्रो.महावीर सिंह नेगी एवं प्रो.भानु प्रसाद नैथानी द्वारा तैयार की गई थी। आयोजन सचिव डॉ.राकेश सैनी के निर्देशन में सभी तकनीकी सत्रों का सफल संचालन हुआ। कार्यशाला में शोध प्रस्तुत करने वालों में प्रमुख रूप से प्रो.सीमा जलान,प्रो.एम.एस.जागलान,पो.अमित डोडसे,प्रो.प्रियंका डे,डॉ.रुचिका सिंह,डॉ.अविनाश खांडेकर,डॉ.सुबरा मलिक,डॉ.अतुल कुमार एवं डॉ.शिल्पी यादव शामिल रहे। इनके साथ तकनीकी संचालन में डॉ.धीरज,डॉ.रंजन,डॉ.नरेंद्र,डॉ.अनिल दत्त,डॉ.योगम्बर नेगी तथा अन्य अध्यापकों और शोधार्थियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यशाला के दौरान गढ़वाल विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा भी उपस्थित रहे। उन्होंने आयोजन की उत्कृष्टता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न केवल अकादमिक दृष्टि से उपयोगी हैं,बल्कि यह छात्रों में अनुसंधान की चेतना को भी सशक्त बनाते हैं। शोध,नवाचार और पर्यावरण चेतना का संगम-अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन का पूरा वातावरण ज्ञान,शोध और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व से ओतप्रोत रहा। कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि पृथ्वी के परिवर्तनशील स्वरूप को समझना और उसके अनुरूप समाज का निर्माण करना ही सच्चे अर्थों में विकास और अस्तित्व की रक्षा है।

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