हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के वरिष्ठ नेता और चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक तथा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने सरकार से मांग की है कि राज्य निर्माण में अग्रणी और निर्णायक भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों को विशेष श्रेणी में सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 में खटीमा से शुरू हुआ राज्य आंदोलन केवल विरोध का नहीं,बल्कि एक ऐतिहासिक जनजागरण था,जिसमें हजारों आंदोलनकारियों ने तन,मन और धन से अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि वर्ष 1994 में खटीमा की धरती से उपजे इस आंदोलन ने पूरे उत्तराखंड में जनभावना की लहर पैदा कर दी थी। उस दौर में क्षेत्र के सैकड़ों जागरूक नागरिकों ने न्याय और स्वाभिमान की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई। कई आंदोलनकारी न्यायालयों में अपने साथियों की पैरवी करते रहे,तो कई लगातार धरना-प्रदर्शन,जुलूसों और संघर्षों में जुटे रहे। राज्य निर्माण तक उन्होंने दिल्ली और देहरादून दोनों सरकारों के समक्ष जनता की आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल छह वर्षों का नहीं था,बल्कि उन 64 वर्षों का परिणाम था जब उत्तराखंड की जनता ने अपने अधिकार और पहचान के लिए लगातार आवाज उठाई। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि दुर्भाग्यवश आज राज्य निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाने वाले सैकड़ों आंदोलनकारी सरकारी उपेक्षा के शिकार हैं। आज जिन आंदोलनकारियों ने अपने जीवन के स्वर्णिम वर्ष संघर्ष में झोंक दिए,उन्हें भीड़ का हिस्सा मानकर मात्र चिह्नित आंदोलनकारी की सूची में डाल दिया गया है। शासन-प्रशासन ने उनके योगदान का सही मूल्यांकन नहीं किया। उन्होंने कहा कि कई आंदोलनकारी आज भी आर्थिक,सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों से जूझ रहे हैं,जबकि राज्य का अस्तित्व उन्हीं के बलिदान और संघर्ष का परिणाम है। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि अब समय आ गया है कि शासन हर जिले और तहसील स्तर पर आंदोलनकारियों की भूमिका और योगदान की पुनः जांच करवाए। उन्होंने मांग की कि हर तहसील में सूची तैयार कर अग्रणी आंदोलनकारियों की पहचान की जाए,राज्य आंदोलन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वालों को पृथक विशेष श्रेणी में सम्मानित किया जाए,राज्य सरकार इन अग्रणी आंदोलनकारियों को आजीवन विशेष मान्यता और सुविधाएं प्रदान करे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड सरकार उन लोगों को उचित स्थान दे,जिन्होंने पहाड़ की माटी,अस्मिता और पहचान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि राज्य सरकार को यह समझना होगा कि यह केवल सम्मान देने की बात नहीं,बल्कि उन बलिदानियों का ऋण चुकाने का अवसर है जिनकी वजह से उत्तराखंड आज एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा आंदोलनकारियों के सम्मान को सर्वोपरि रखा है,और पार्टी आगे भी इस मुद्दे को पूरी मजबूती से उठाएगी। उत्तराखंड आंदोलन के अग्रणी नेता धीरेंद्र प्रताप ने राज्य सरकार से विशेष सम्मान की मांग करते हुए कहा की संघर्ष करने वालों को भुलाना इतिहास के साथ अन्याय होगा।