स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं को सहेजना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी–जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। गगवाड़स्यूं घाटी की पावन धरती रविवार को बैकुंठ चतुर्दशी मेले के अवसर पर आस्था,संस्कृति और परंपरा के रंगों से सराबोर रही। तहसील पौड़ी के प्रसिद्ध सिद्धपीठ देवलेश्वर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। गगवाड़स्यूं घाटी की पावन धरती रविवार को बैकुंठ चतुर्दशी मेले के अवसर पर आस्था,संस्कृति और परंपरा के रंगों से सराबोर रही। तहसील पौड़ी के प्रसिद्ध सिद्धपीठ देवलेश्वर महादेव मंदिर बलोड़ी में आयोजित इस भव्य मेले में जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया और देवाधिदेव महादेव के दर्शन कर जनपद की सुख-समृद्धि की कामना की। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया का मंदिर परिसर पहुंचने पर स्थानीय जनता ने पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्ययंत्रों के साथ भव्य स्वागत किया। मंदिर समिति की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। अपने संबोधन में जिलाधिकारी ने कहा कि देवलेश्वर महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं,बल्कि 34 से अधिक गांवों की आस्था,लोक परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा यह मंदिर हमारी सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रतीक है। यहां के मेले और थौले गढ़वाल की लोक आत्मा को संजोए हुए हैं। इन्हें सहेजना,संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मंदिर समिति द्वारा रखी गई मांगों पर जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन की ओर से मंदिर की ऐतिहासिक पहचान और स्थापत्य विरासत को सहेजने के लिए विशेष पहल की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मंदिर के ऊपरी हिस्से पर टाइल्स की जगह पारंपरिक शिल्पकारी को प्राथमिकता दी जाएगी। मंदिर परिसर में सूचना पट्ट (साइनेज बोर्ड) लगाए जाएंगे ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इस तीर्थ के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी मिल सके। साथ ही इस तीर्थ की पहचान को स्थानीय घाटी से आगे बढ़ाकर पूरे जनपद और प्रदेश स्तर तक प्रचारित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि देवलेश्वर महादेव केवल पूजन का स्थान नहीं,बल्कि यह हमारी लोककला,स्थापत्य और संस्कृति की विरासत है। इसे सहेजकर ही हम अपने अस्तित्व की रक्षा कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान मंदिर आरती एवं स्तुति पुस्तिका का विमोचन भी जिलाधिकारी द्वारा किया गया। इसके उपरांत स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत चक्रव्यूह नाट्य मंचन मेले का मुख्य आकर्षण रहा। कलाकारों ने महाभारत के प्रसंग को जीवंत कर उपस्थित श्रद्धालुओं से तालियों की गड़गड़ाहट बटोरी। मेले में लोकनृत्य,भजन संध्या,लोकगीतों और पारंपरिक खेलों का भी आयोजन हुआ,जिसने पूरे वातावरण को भक्ति और लोक उल्लास से भर दिया। इस अवसर पर तहसीलदार दीवान सिंह राणा,ग्राम प्रधान पूजा देवी,मंदिर समिति अध्यक्ष केसर सिंह कठैत,सचिव जगत किशोर बड़थ्वाल,संचालक नागेंद्र जुगराण सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक,जनप्रतिनिधि और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर जिलाधिकारी ने सभी ग्रामवासियों और समिति सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि देवलेश्वर महादेव जैसे तीर्थस्थल हमारी पहचान हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन केवल प्रशासन का नहीं,बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है। जहां संस्कृति है,वहीं समाज की आत्मा बसती है-देवलेश्वर महादेव में गूंजा लोक आस्था और परंपरा का संदेश।

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