रक्तदान महादान-जामा मस्जिद श्रीनगर में 88 यूनिट रक्त संग्रह-मुस्लिम समुदाय ने पेश की इंसानियत की मिसाल

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। इंसानियत सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है इसी भावना के साथ आज 6 नवंबर 2025 को देवभूमि श्रीनगर की जामा मस्जिद परिसर में तृतीय विशाल रक्तदान शिविर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। इंसानियत सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है इसी भावना के साथ आज 6 नवंबर 2025 को देवभूमि श्रीनगर की जामा मस्जिद परिसर में तृतीय विशाल रक्तदान शिविर का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रेरणादायी आयोजन में समस्त मुस्लिम समुदाय ने एकजुट होकर समाज सेवा और मानवता का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। शिविर का संचालन बेस अस्पताल श्रीकोट के ब्लड बैंक विभाग की टीम ने डॉ.ओमप्रकाश सेमवाल के कुशल मार्गदर्शन में किया। इस दौरान कुल 88 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ,जिसे श्रीकोट मेडिकल कॉलेज अस्पताल को सौंपा गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी,जिला व्यापार मंडल अध्यक्ष बासुदेव कंडारी,प्रसिद्ध समाजसेवी अनिल स्वामी,श्रीनगर व्यापार मंडल अध्यक्ष दिनेश असवाल और रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष रोटेरियन खिलेन्द्र चौधरी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में परवेश अहमद,मीना रावत,प्रदीप तिवारी,पार्षद कु.रश्मी,वकील अहमद,आशिफ अहमद,नजमुल राव,जावेद,जामिन अंसारी,समीम,इमाम मुफ्ती जुबैर,मोहम्मद राकिव तथा भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की पूर्व जिला अध्यक्ष नगमा आदि विशिष्ट जनों की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। शिविर के दौरान सभी अतिथियों को रक्तदान-महादान का प्रतीक चिन्ह सप्रेम भेंट कर मस्जिद कमेटी की ओर से सम्मानित किया गया। साथ ही रोटरी क्लब श्रीनगर,व्यापार मंडल,समाजसेवी संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों को भी उनकी सक्रिय भूमिका के लिए विशेष रूप से सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मोहम्मद जामिन अंसारी ने कहा कि रक्तदान किसी के जीवन की डोर थामने का कार्य है। इससे बड़ा कोई दान नहीं हो सकता। मुस्लिम समुदाय सदैव इंसानियत,भाईचारे और सहयोग का संदेश देता आया है। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि रक्तदान जैसी पुनीत भावना समाज को नई दिशा देती है और यह कार्य मजहबी नहीं बल्कि मानवीय है। मस्जिद कमेटी,रोटरी क्लब श्रीनगर,व्यापार मंडल,सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय युवाओं के समर्पण से सम्पन्न यह शिविर इस बात का प्रतीक बन गया कि धर्म वही,जो मानवता के काम आए और इंसानियत ही सबसे बड़ी इबादत है।

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