
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। भारत सरकार के निर्देशानुसार वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में शुक्रवार को देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव से ओतप्रोत एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर स्थित एसीएल सभागार में संपन्न हुआ,जिसकी अध्यक्षता प्रभारी कुलपति प्रोफेसर एम.एस.एम.रौथाण ने की। कार्यक्रम का संयोजन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाईं के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सामूहिक गायन से हुआ। जैसे ही सभागार में एक स्वर में वंदे मातरम गूंजा,पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति और एकता की भावना से सराबोर हो उठा। शिक्षकों,अधिकारियों,कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने एकजुट होकर इस ऐतिहासिक क्षण में अपनी उपस्थिति दर्ज की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण भी देखा। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में वंदे मातरम को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बताते हुए कहा कि यह गीत उस जनचेतना का प्रतीक है जिसने देश को पराधीनता से मुक्त कराया। उन्होंने देशवासियों से राष्ट्रनिर्माण के नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। प्रभारी कुलपति प्रो.एम.एस.एम.रौथाण ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा वंदे मातरम केवल एक राष्ट्रगीत नहीं,बल्कि यह भारत की आत्मा की पुकार है। यह गीत हमारे भीतर देशभक्ति,एकता और त्याग का भाव जगाता है। मातृभूमि के प्रति समर्पण की यह भावना ही भारत की पहचान है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गर्व को और अधिक सुदृढ़ करेगा। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाईं ने कहा कि छात्र जीवन राष्ट्र के भविष्य की नींव है। वंदे मातरम का सामूहिक गायन युवाओं में अनुशासन,एकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को प्रज्वलित करता है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय आगामी एक वर्ष तक इस अमृत अवसर को प्रेरणादायक रूप में मनाएगा। इसके अंतर्गत विभिन्न विभागों में वाद-विवाद प्रतियोगिताएं,निबंध लेखन,सांस्कृतिक आयोजन और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य नियंता प्रो.एस.सी.सती,प्रो.एच.सी.नैनवाल,प्रो.मंजुला राणा,प्रो.वाई.एस.फर्स्वाण,प्रो.अतुल ध्यानी सहित अनेक विभागों के शिक्षक,अधिकारी,कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में वंदे मातरम गाते हुए भारतीय संस्कृति,स्वतंत्रता चेतना और एकता के उस अमर भाव को पुनः जीवित किया,जिसने कभी देश को स्वतंत्रता की राह दिखाई थी। वंदे मातरम के 150 वर्ष पर यह आयोजन केवल एक स्मरण नहीं,बल्कि यह राष्ट्र के प्रति समर्पण,एकता और नवजागरण की सामूहिक अभिव्यक्ति बन गया।