बैकुंठ चतुर्दशी मेले में उत्तराखंड राज्य निर्माण के योद्धाओं को किया सम्मानित

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भंडारी श्रीनगर गढ़वाल। ऐतिहासिक बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले की छठवीं संध्या इस बार केवल गीत-संगीत और सांस्कृतिक उल्लास तक सीमित नहीं रही,बल्कि यह राज्य निर्माण आंदोलन के पुरोधाओं के सम्मान को

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भंडारी

श्रीनगर गढ़वाल। ऐतिहासिक बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले की छठवीं संध्या इस बार केवल गीत-संगीत और सांस्कृतिक उल्लास तक सीमित नहीं रही,बल्कि यह राज्य निर्माण आंदोलन के पुरोधाओं के सम्मान को समर्पित रही। उत्तराखंड राज्य के गठन की रजत जयंती वर्ष में यह संध्या उन वीर सपूतों को समर्पित की गई जिन्होंने सड़क से लेकर संसद तक अलग राज्य की मांग के लिए संघर्ष किया और अपनी त्यागमयी यात्रा से इतिहास रचा। नगर निगम श्रीनगर की ओर से आयोजित इस सम्मान समारोह में शहर के उन आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने राज्य निर्माण की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मेयर आरती भण्डारी और निगम पार्षदों ने आंदोलनकारियों को प्रतीक चिन्ह और शॉल भेंटकर सम्मानित किया। मेयर भण्डारी ने कहा उत्तराखंड का निर्माण केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था,बल्कि यह लाखों जनमानस के संघर्ष,बलिदान और संकल्प का परिणाम था। जिन आंदोलनकारियों ने उस दौर में नारे लगाए,प्रदर्शन किए,जेल गए-वही आज हमारे राज्य के गौरवशाली इतिहास के जीवंत अध्याय हैं। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि नई पीढ़ी अपने राज्य के इस स्वर्णिम इतिहास को जाने और उस संघर्ष भावना को अपने जीवन में उतारे। बैकुण्ठ मेला केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं,बल्कि यह हमारी सामाजिक चेतना और सामूहिक भावना का प्रतीक है। नगर निगम के पार्षदों ने भी अपने संबोधन में राज्य आंदोलन के पुरोधाओं को पर्वतीय अस्मिता के सच्चे रक्षक बताया। उन्होंने कहा कि जिन आंदोलनकारियों ने सड़क से लेकर संसद तक अपनी आवाज बुलंद की,वही आज के उत्तराखंड के वास्तविक नायक हैं। उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि श्रीनगर जैसे ऐतिहासिक नगर ने आंदोलन के हर चरण में सक्रिय भूमिका निभाई थी। कई वक्ताओं ने कहा कि यह सम्मान केवल कुछ व्यक्तियों का नहीं,बल्कि उन तमाम अनसुने चेहरों का भी है जिन्होंने अपने हिस्से की ऊर्जा और आस्था इस राज्य निर्माण में लगाई। कार्यक्रम में सम्मानित आंदोलनकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद जनता ने आंदोलन को जनांदोलन में बदला। कई बुजुर्ग आंदोलनकारियों ने अपनी आंखों में नमी के साथ उस दौर की यादें ताजा की। उन्होंने युवाओं से अपील की की राज्य बन गया है अब उसे विकसित करना हमारी नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक,जनप्रतिनिधि,अधिकारी,पार्षद और सांस्कृतिक दलों के सदस्य उपस्थित रहे। समारोह का वातावरण देशभक्ति और गर्व की भावना से ओतप्रोत रहा। कार्यक्रम के अंत में राज्य के अमर शहीदों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। बैकुण्ठ मेले की यह छठवीं संध्या केवल संस्कृति नहीं,बल्कि उत्तराखंड के संघर्षमय इतिहास की झलक बनकर गूंजती रही-एक ऐसी संध्या,जिसने भक्ति,संस्कृति और बलिदान-तीनों की भावना को एक सूत्र में पिरो दिया।

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