
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की उत्साही भागीदारी के बीच ऐतिहासिक बैकुण्ठ चतुर्दशी मेला सोमवार को सांस्कृतिक रंग,आस्था और लोक धुनों की मधुर लहरों के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। श्रीनगर की पहचान बन चुका यह मेला इस बार पहले से अधिक भव्य और सुव्यवस्थित रहा,जिसने परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि,स्थानीय विधायक एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने नगर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों,समाजसेवियों और चिकित्सकों को सम्मानित कर समारोह की गरिमा बढ़ाई। उन्होंने कहा कि बैकुण्ठ चतुर्दशी मेला न केवल श्रीनगर की आस्था और लोक-परंपरा का प्रतीक है,बल्कि यह सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का भी प्रेरक मंच है। डॉ.रावत ने कहा इस मेले की खूबसूरती इसकी लोक आत्मा में है-यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव और समाजिक सौहार्द का जीवंत प्रतीक है। इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति,कला और परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने मेला आयोजन समिति,प्रशासन,नगर निगम और आम नागरिकों को मेले के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। मेयर आरती भंडारी ने अपने संबोधन में कहा कि बैकुण्ठ मेला अब श्रीनगर नगर की सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक बन चुका है। नगर निगम द्वारा मेले की स्वच्छता,प्रकाश व्यवस्था,पेयजल और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा यह मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं है,बल्कि स्थानीय कलाकारों,युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करता है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा पाण्डवज बैंड की ऊर्जावान और लोकसंगीत से सराबोर प्रस्तुति। बैंड ने अपने लोकप्रिय गीत-समलौण,घुघूती बासुती,फुलारी,बडुली,जन्दौली,रुंदै,घुघयाल,राधा,गाजणा,नंदा तेरो डोला,गणपति देवा,रंगीलो फागुन,एगेनी फुल्लारी,सुफल,हल्ला धूम धड़ाक्का,हे जनमभूमि,सायरा गांव,मवारी,केदारनाथ और लेंगु पदिगे मेंगु बिंदी जैसे लोकगीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। बैंड की मनमोहक धुनों पर देर तक तालियां गूंजती रहीं और पूरा मैदान लोकसंगीत और उत्साह से भर उठा। कार्यक्रम में लैंसडाउन विधायक दलीप रावत,जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत,नगर आयुक्त नूपुर वर्मा,पूर्व पालिका अध्यक्ष मोहन लाल जैन सहित अनेक जनप्रतिनिधि,अधिकारी और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह का कुशल संचालन लखपत सिंह भंडारी ने किया। मेले के समापन अवसर पर नगर निगम,प्रशासन और स्थानीय संगठनों के सामूहिक प्रयासों से एक बार फिर सिद्ध हुआ कि श्रीनगर का बैकुण्ठ मेला केवल धार्मिक उत्सव नहीं,बल्कि जनभावनाओं,लोक-संस्कृति और एकता की अनूठी अभिव्यक्ति है। गूंज उठा श्रीनगर-जय बैकुण्ठ धाम,जय लोक संस्कृति।