
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों में जहां कभी सीमित संसाधन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां खेती के लिए चुनौती मानी जाती थीं,वहीं आज मेहनत,संकल्प और नवाचार के सहारे आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी लिखी जा रही है। पौड़ी जनपद के विकासखंड एकेश्वर के ग्राम पातल में रहने वाले किसान कुलदीप किशोर जोशी ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में लगन हो तो पहाड़ की मिट्टी भी सोना उगा सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में राज्य सरकार द्वारा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जो योजनाएं शुरू की गई,उनका वास्तविक लाभ अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। इसी दिशा में कुलदीप जोशी की कहानी पूरे राज्य के किसानों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी है। लॉकडाउन के कठिन दौर में जब जीवन की रफ्तार थम गई थी,तब कुलदीप जोशी ने ठहराव को चुनौती दी। उन्होंने उद्यान विभाग की सहायता से अपने खेतों में 200 कीवी पौधे लगाए और यहीं से शुरू हुआ उनका नया सफर। शुरुआत में यह प्रयोग कई लोगों को जोखिम भरा लगा,लेकिन कुलदीप ने मेहनत,वैज्ञानिक तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के बल पर इस प्रयास को सफल व्यवसायिक खेती में बदल दिया। आज उनके खेतों में कीवी की हर बेल उनके संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी कह रही है। कुलदीप बताते हैं कि उद्यान विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ लगातार खेत पर पहुंचकर तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन देते रहे,जिससे उत्पादन गुणवत्ता में निरंतर सुधार हुआ। इस वर्ष कुलदीप जोशी ने 5 से 6 क्विंटल कीवी का उत्पादन किया है,जो उनके निजी स्टोरेज यूनिट्स में सुरक्षित रखा गया है। लगभग 1 क्विंटल फल अभी भी पेड़ों पर लदे हैं। बेहतर स्टोरेज सुविधा के कारण वे उत्पाद को लंबे समय तक सुरक्षित रख पाते हैं और बाजार में उचित मूल्य प्राप्त करते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष लगभग 1 से 1.5 क्विंटल कीवी की बिक्री कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है। पिछले वर्ष जहां उन्हें 1,20,000 रुपए का लाभ हुआ था,वहीं इस बार यह आय बढ़कर लगभग 2,50,000 रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। यह आंकड़ा न केवल व्यक्तिगत सफलता का प्रतीक है,बल्कि पहाड़ी कृषि की बदलती दिशा की कहानी भी कहता है। जिला उद्यान अधिकारी राजेश तिवारी के अनुसार मुख्यमंत्री धामी के मार्गदर्शन में विभाग किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर फलोत्पादन,प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन आधारित कृषि की ओर ले जा रहा है। उन्होंने कहा कुलदीप जोशी जैसे किसान यह प्रमाण हैं कि यदि आधुनिक तकनीक,वैज्ञानिक सोच और सरकारी सहयोग साथ हो तो पहाड़ की भूमि भी उच्च मूल्य वाले फलों की उपज में अग्रणी बन सकती है। अब कुलदीप जोशी न केवल अपने गांव में बल्कि पूरे क्षेत्र में आधुनिक किसान के रूप में पहचाने जाते हैं। वे अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को रोजगार और आत्मनिर्भरता का साधन बनाया जा सकता है। कुलदीप कहते हैं पहाड़ की धरती में कमी नहीं है,बस सही दिशा,मेहनत और विभागीय सहयोग की जरूरत है। जब सरकार और किसान एक साथ चलते हैं,तो आत्मनिर्भरता सपना नहीं सच्चाई बन जाती है। कुलदीप जोशी की यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं बल्कि एक आर्थिक क्रांति का प्रतीक है जो यह सिद्ध करती है कि पहाड़ की मिट्टी में भी भविष्य की समृद्धि के बीज छिपे हैं। मेहनत,मार्गदर्शन और उम्मीद ने कीवी की बेलों से लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी-पातल गांव बना ग्रामीण नवाचार का उदाहरण।