एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में द एआई कम्पेरेटिव पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के जैव प्रौद्योगिकी विभाग एवं जंतु विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार 12 नवम्बर 2025 को कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिकित्सीय

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के जैव प्रौद्योगिकी विभाग एवं जंतु विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार 12 नवम्बर 2025 को कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिकित्सीय विकास में तेजी विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गढ़वाल विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के सेमिनार कक्ष में संपन्न हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) की उन असीम संभावनाओं का अध्ययन करना था,जो चिकित्सा अनुसंधान,औषध निर्माण तथा जैव-चिकित्सीय नवाचार के क्षेत्र में परिवर्तनकारी सिद्ध हो रही हैं। प्रतिभागियों ने जाना कि किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक दवा निर्माण,रोग विश्लेषण और नैदानिक परीक्षण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी,सुरक्षित और सटीक बना रही है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ,जिसके पश्चात् जंतु विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. मंजी गुसाईं ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यशाला के संयोजक प्रो.जी.के.जोशी अध्यक्ष जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने अपने संबोधन में कहा आधुनिक जैव-चिकित्सीय अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक क्रांतिकारी उपकरण के रूप में उभर रही है। यह तकनीक वैज्ञानिक अनुसंधान की गति बढ़ाने के साथ-साथ उपचार की सटीकता और प्रभावशीलता को नई दिशा प्रदान कर रही है। कार्यशाला की मुख्य वक्ता प्रो.रीना घिल्डियाल,प्राध्यापक एमेरिटा कैनबरा विश्वविद्यालय ऑस्ट्रेलिया रहीं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिकित्सीय विकास में तेजी विषय पर अत्यंत ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ए.आई.तकनीक दवा लक्ष्य की पहचान,प्रमाणीकरण तथा पूर्व नैदानिक परीक्षणों (प्री-क्लिनिकल ट्रायल्स) की योजना और प्रबंधन में सहायक सिद्ध हो रही है। प्रो.घिल्डियाल ने कहा कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैज्ञानिकों के लिए अनुसंधान को अधिक सुलभ बना रही है। यह तकनीक न केवल दवा विकास की प्रक्रिया को गति दे रही है बल्कि व्यक्तिगत उपचार और रोग की पूर्व पहचान में भी सहायक है। कार्यशाला के दौरान उन्होंने एक व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र (हैंड्स-ऑन सेशन) का भी संचालन किया,जिसमें प्रतिभागियों को यह सिखाया गया कि किस प्रकार संगणनात्मक बुद्धिमत्ता (कंप्यूटेशनल इंटेलिजेंस) के प्रयोग से औषध विकास और अनुसंधान की गुणवत्ता में तेजी लाई जा सकती है। इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में जीवविज्ञान और औषध विज्ञान से संबंधित विषयों के लगभग 70 प्रतिभागियों जिनमें शोधार्थी,शिक्षक एवं विद्यार्थी शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन शिप्रा खंडूरी,शोधार्थी,जंतु विज्ञान विभाग ने किया,जबकि डॉ.गौरव भट्ट एवं डॉ.बबीता राणा ने कार्यक्रम सचिवों के रूप में सभी सत्रों का प्रभावी संचालन और प्रमाणपत्र वितरण सुनिश्चित किया। समापन सत्र में डॉ.बबीता राणा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी अतिथियों,प्रतिभागियों एवं आयोजन दल के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो.मुरुग्राज,डॉ.दीपक भंडारी,डॉ.पूजा सकलानी,डॉ.राम साहू,डॉ.डिगर तथा डॉ.गुंजन सहित अनेक प्राध्यापक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करते हैं,बल्कि युवा शोधार्थियों में नवाचार की भावना को भी प्रोत्साहित करते हैं। इस तरह की कार्यशालाएं विश्वविद्यालय में नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता को नई ऊर्जा देती हैं।

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