
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक न्याय और विधिक सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वाल्मीकि बस्ती,पौड़ी में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उपस्थित ग्रामीणों,वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम,2007 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज नाजिश कलीम उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम देश के वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता के सम्मानजनक जीवन,भरण-पोषण और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने बताया कि इस कानून के अंतर्गत प्रत्येक संतान और कानूनी वारिस की जिम्मेदारी है कि वे अपने माता-पिता को उचित भोजन,चिकित्सा,आवास और सम्मान प्रदान करें। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को बताया कि वरिष्ठ नागरिक अपने भरण-पोषण हेतु विधिक रूप से आवेदन कर सकते हैं। संपत्ति संरक्षण के लिए अधिनियम में स्पष्ट व्यवस्था की गई है। यदि संतान माता-पिता की उपेक्षा करती है,तो उनके खिलाफ कार्यवाही भी की जा सकती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जरूरतमंदों,निर्धनों और वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क विधिक सहायता और परामर्श प्रदान करता है। सचिव ने यह भी कहा कि जागरूकता ही अधिकारों की पहली सीढ़ी है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने विधिक अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए,ताकि वे समय पर न्याय और सहयोग प्राप्त कर सकें। शिविर में रिटेनर अधिवक्ता कुसुम नेगी,अधिकार मित्र बबीता,निशा,मनोज पाल सहित वाल्मीकि समुदाय के वरिष्ठ नागरिक,महिलाएं और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने शिविर को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज के कमजोर तबकों को न केवल जानकारी प्रदान करते हैं,बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की यह पहल समाज के उन वर्गों तक न्याय की रोशनी पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है,जो अक्सर जागरूकता की कमी के कारण अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।