वंदे मातरम् में बसती है भारत की आत्मा–डॉ.चंडी प्रसाद घिल्डियाल

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। संविधान दिवस के अवसर पर आज देहरादून स्थित आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय का प्रांगण राष्ट्रीय चेतना,संस्कृत संस्कृति और देशभक्ति के भावों से ओतप्रोत रहा। कार्यक्रम के मुख्य

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। संविधान दिवस के अवसर पर आज देहरादून स्थित आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय का प्रांगण राष्ट्रीय चेतना,संस्कृत संस्कृति और देशभक्ति के भावों से ओतप्रोत रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सहायक निदेशक संस्कृत शिक्षा डॉ.चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि वंदे मातरम् गीत में भारत की आत्मा का वास है और इस आत्मा के प्राण संस्कृत भाषा में बसते हैं। इसलिए इस गीत को संस्कृत में गाकर उसकी आध्यात्मिकता,पवित्रता और राष्ट्रभाव को और भी प्रभावी बनाया गया है। डॉ.घिल्डियाल ने जनपद के प्राथमिक से उच्च शिक्षा स्तर तक उपस्थित छात्र-छात्राओं,प्राचार्यों,शिक्षकों,प्रोफेसरों तथा कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा देवभूमि भारत की गाथा, देववाणी संस्कृत में ही अपने सही भाव,सही स्वर और सही अर्थों में अभिव्यक्त हो सकती है। वंदे मातरम् का संस्कृत रूप हमारे राष्ट्रीय गौरव को नई ऊंचाई देता है। उन्होंने सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों से आह्वान किया कि वंदे मातरम् केवल औपचारिकता का गीत न बनकर दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बने। यदि हमारे नौनिहाल प्रतिदिन इस गीत को गाएंगे तो उनमें राष्ट्रीय कर्तव्य,अनुशासन और सेवा भावना का भाव स्वतः जागृत होगा। प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं संस्कृत विदुषी आचार्य अन्नपूर्णा ने अपने वक्तव्य में केंद्र एवं राज्य सरकार के उस निर्णय का स्वागत किया जिसमें विद्यालयों और महाविद्यालयों में महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना आनंद मठ से लिए गए वंदे मातरम् को सुर-ताल सहित गाने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा यह निर्णय केवल एक आदेश नहीं बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम है। इससे विद्यार्थियों में राष्ट्रनिर्माण के संस्कार और भी गहरे होंगे। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.दीपशिखा ने स्वयं किया। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा डॉ.घिल्डियाल और आचार्य अन्नपूर्णा के महाविद्यालय में आगमन से न केवल इस संस्थान का गौरव बढ़ा है,बल्कि पूरे जनपद के विद्यालयों को इस राष्ट्रीय अभियान से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रेरक संबोधन के बाद भविष्य में विद्यालयों और महाविद्यालयों में वंदे मातरम् के संस्कृत रूप को लेकर व्यापक चेतना और उत्साह देखने को मिलेगा। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्य,शिक्षक,प्रोफेसर,कर्मचारीगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। सभी ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान,वंदे मातरम् और संविधान दिवस की शपथ कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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