शौर्य का जीवंत प्रतीक भरत चौधरी-भालू से भिड़कर बचाई जान,बेस अस्पताल में चल रहा उपचार

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। रुद्रप्रयाग जनपद की रानीगढ़ पट्टी के कोट मल्ला गांव निवासी भरत चौधरी एक बार फिर अपने अदम्य साहस और वीरता की मिसाल पेश करते हुए चर्चा में

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। रुद्रप्रयाग जनपद की रानीगढ़ पट्टी के कोट मल्ला गांव निवासी भरत चौधरी एक बार फिर अपने अदम्य साहस और वीरता की मिसाल पेश करते हुए चर्चा में हैं। बुधवार सुबह जंगल से लौटते समय उन पर अचानक भालू ने हमला कर दिया। संकट की घड़ी में भरत ने जिस बहादुरी से इस खतरनाक वन्यजीव से संघर्ष किया,वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। सुबह पानी खोलकर घर लौट रहे भरत को जंगल के रास्ते में अचानक भालू ने घेर लिया। हमले के दौरान भालू ने उनके पैर पर जबर्दस्त वार किया। गंभीर दर्द और खौफ के बीच भी भरत ने हिम्मत नहीं खोई। जान बचाने की कोशिश में वह पास के पेड़ पर चढ़े,लेकिन भालू भी पीछे-पीछे ऊपर चढ़ने लगा। मजबूरी में भरत ने साहस बटोरकर भालू को लात मारी,तभी भालू ने उनके एक पैर को अपने जबड़े में जकड़ लिया,जिससे उनका पैर बुरी तरह जख्मी हो गया। भरत ने शोर मचाकर और दूसरी टांग से वार कर किसी तरह भालू को पीछे हटने पर मजबूर किया। उनके साहस के कारण ही आज उनकी जान बच सकी। गंभीर रूप से घायल भरत को ग्रामीणों ने तुरंत जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर चिकित्सा के लिए श्रीकोट बेस अस्पताल रेफर कर दिया। बेस अस्पताल में सर्जरी और आर्थो विशेषज्ञों की टीम ने भरत के जख्मों का तत्काल उपचार किया। इसी दौरान मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना स्वयं एक्स-रे कक्ष और इमरजेंसी पहुंचे तथा भरत का हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों को हर संभव बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। भरत की आपबीती-पेड़ पर चढ़ा तो भालू भी पीछे आ गया। बेस अस्पताल में भर्ती भरत ने बताया कि पिछले कई दिनों से रानीगढ़ इलाके में भालू का आतंक बना हुआ है। उन्होंने कहा मैं पानी खोलकर लौट रहा था कि अचानक भालू सामने आ गया। जान बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ा,लेकिन वह भी ऊपर चढ़ने लग गया। मजबूरी में उसे लात मारी तो उसने मेरे पैर को मुंह में दबोच लिया। किसी तरह चीखकर और दूसरी टांग से मारकर मैंने उसे भगाया। भरत चौधरी का यह पराक्रम कोई पहली घटना नहीं है। 1991 में उन्होंने घास लेने गई दो महिलाओं पर झपटे एक गुलदार से अकेले भिड़कर उनकी जान बचाई थी। उनकी वीरता को देखते हुए उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री स्व.कल्याण सिंह ने उन्हें जीवन रक्षा पदक और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया था। भरत चौधरी की अदम्य हिम्मत और जुझारूपन एक बार फिर लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक सभी उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना कर रहे हैं। भरत जैसे ग्रामीण न सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों की जीवन-यात्रा को नई परिभाषा देते हैं,बल्कि यह भी साबित करते हैं कि मुश्किलों के सामने साहस और धैर्य ही सबसे बड़ी ढाल है।

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