बच्छणस्यूं-डूंगरा में भालू ने फाड़ी गौशाला,लहूलुहान ग्रामीणों का फूटा गुस्सा-कब जागेगी सरकार

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव जीवन आज गंभीर संकट से गुजर रहा है। गांव खाली हो रहे हैं,खेती-किसानी चौपट पड़ चुकी है और जंगली जानवरों का

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव जीवन आज गंभीर संकट से गुजर रहा है। गांव खाली हो रहे हैं,खेती-किसानी चौपट पड़ चुकी है और जंगली जानवरों का आतंक हर दिन नई त्रासदी लेकर आ रहा है। महिलाओं,बुजुर्गों और बच्चों के लिए घर से कुछ कदम बाहर जाना भी जोखिम से खाली नहीं है। गूलदार,भालू और बंदरों का तांडव-पहाड़ के गांव रहने योग्य नहीं रहे,खेतों में जाना जोखिम,बच्चों के स्कूल जाने की राह असुरक्षित,पालतू पशुओं का शिकार,शाम होते ही घरों में कैद होने को मजबूर,खेती पर बंदरों का कहर। लेकिन इस भयावह स्थिति के बीच सरकार की चुप्पी और वन विभाग की निष्क्रियता,पहाड़वासियों को और निराश कर रही है। गांवों में यह धारणा गहराती जा रही है कि सरकार को इंसानों से ज्यादा वन्यजीवों की चिंता है। बच्छणस्यूं पट्टी के ग्राम डूंगरा में भालू ने रात के समय विनोद सिंह पुत्र मदन सिंह की गौशाला तोड़कर गाय,बैल और अन्य मवेशियों को बुरी तरह घायल कर दिया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि भालू और गुलदार दोनों दिन-रात खूंखार रूप ले चुके हैं,गांव से बाहर निकलने में भी डर लगता है। फतेहपुर-खाखरा के पूर्व प्रधान प्रदीप मलासी ने कहा यदि तुरंत कार्रवाई नहीं की गई,तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। शीघ्र ही एक प्रतिनिधि मंडल डीएफओ और जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग से मिलकर समाधान की मांग करेगा। ग्राम बणसों के निवासी अनूप सिंह रावत ने भी वन्यजीवों के आतंक पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा वन विभाग को अब और देरी नहीं करनी चाहिए। क्षेत्रवासियों को इस समस्या से राहत दिलाने के लिए तत्काल उचित कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि आज हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण न खेत में सुरक्षित हैं,न घर में। ग्रामीणों का आरोप है कि घटनाएं बढ़ रही हैं,लोग मर रहे हैं,गांव खाली हो रहे हैं,खेत उजड़ रहे हैं। लेकिन सरकार और वन मंत्री की चुप्पी अजीब और असंवेदनशील है। ग्रामीणों का कहना है अगर अभी नहीं जागे,तो पहाड़ आने वाले समय में केवल मानचित्रों में बचेगा आबादी के बिना। ग्रामीणों की प्रमुख मांगें मानव-वन्यजीव संघर्ष क्षेत्र में विशेष अभियान,खतरनाक भालू और गूलदार का ट्रांसलोकेशन,गांवों की सुरक्षा हेतु फेंसिंग,लाइटिंग और चेतावनी सिस्टम,त्वरित रेस्क्यू टीम सक्रिय,मुआवजा प्रक्रिया सरल और तत्काल।

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