
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ कल 4 दिसंबर 2025 से होने जा रहा है। यह विशेष प्रशिक्षण 10 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा,जिसमें देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शैक्षणिक उपयोग की गहन समझ प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम का उद्घाटन आगरा विश्वविद्यालय के सीएसी विभागाध्यक्ष प्रो.मनु प्रताप सिंह द्वारा किया जाएगा। प्रो.सिंह गढ़वाल विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के विजिटर नॉमिनी भी हैं,जिनकी उपस्थिति कार्यक्रम में विशेष महत्व जोड़ेगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह भी उद्घाटन सत्र में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगे,जिससे कार्यक्रम की प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ेगी। मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक प्रो.देवेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 40 शिक्षक प्रतिभागी प्रत्यक्ष रूप से भाग लेंगे। यह कार्यक्रम विशेष रूप से उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वर्तमान और भविष्य की भूमिका को समझाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि आज का युग तकनीक-प्रधान है,और ऐसे में एआई के प्रयोग व प्रभावों को समझना शिक्षकों के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है। यह प्रशिक्षण उन्हें शिक्षण-पद्धति में न केवल नवाचार लाने में मदद करेगा,बल्कि विद्यार्थियों के लिए भी अधिक प्रभावी और आधुनिक शिक्षण शैली विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा। प्रो.नेगी ने जानकारी दी कि पूरे देश के IIT,JNU सहित कई प्रमुख विश्वविद्यालयों के प्रतिष्ठित रिसोर्स पर्सन इस कार्यक्रम में व्याख्यान देंगे। ये विशेषज्ञ एआई के तकनीकी,शैक्षणिक,सामाजिक और नैतिक आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान एआई के शैक्षणिक अनुप्रयोग,डेटा संचालित शिक्षण तकनीक,स्मार्ट क्लासरूम मॉडल,डिजिटल संसाधनों का विकास तथा उच्च शिक्षा क्षेत्र में भविष्य की तकनीकी संभावनाओं पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल शिक्षकों को नई तकनीक से परिचित कराएगा,बल्कि उन्हें भविष्य की शिक्षण चुनौतियों से निपटने के लिए सक्षम भी बनाएगा। उच्च शिक्षा में एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह आयोजन गढ़वाल विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।