
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
नई दिल्ली/श्रीनगर गढ़वाल। भारत की आध्यात्मिक धरोहर आज अपनी सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रही है। वे मंदिर,जिनमें कभी भक्ति के स्वर गूंजते थे,दीपों की लौ रातें रोशन करती थी और जिनके आंगन में पीढ़ियां संस्कार सीखती थीं-वही मंदिर आज जर्जर ढांचों में बदलते जा रहे हैं। ताजा सर्वेक्षण ने एक चिंताजनक तस्वीर देश के सामने रखी है-लगभग 2 लाख प्राचीन मंदिर या तो टूट रहे हैं,या गिरने की कगार पर खड़े हैं। सर्वेक्षण के अनुसार-अनेक मंदिरों की छतें वर्षो से टपक रही हैं,कई गर्भगृह इतने कमजोर हो चुके हैं कि पूजा बंद करनी पड़ी,हजारों शिखरों में दरारें खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी हैं,अनेक मंदिर वर्षों से बिना दीप,बिना पूजा,वीराना बने पड़े हैं,कई मंदिर बारिश में गिरने की चेतावनी दे चुके हैं। यह सिर्फ ईंट-पत्थर का क्षरण नहीं भारत की सांस्कृतिक आत्मा का क्षरण है। विरासत के प्रहरी आज लाचार-ग्रामीणों की आंखें नम एक 78 वर्षीय पुजारी टूटे गर्भगृह की ओर देखते हुए बोले बेटा बरसात में मंदिर के अंदर खड़ा होना तक मुश्किल हो जाता है। यह मंदिर नहीं बचेगा तो गांव की आत्मा भी टूटी समझना। ग्रामीणों ने कहा हमारी शादियां,त्यौहार,कथा सब यहीं होते थे। अब यह खंडहर जैसा लगने लगा है। इन आवाज़ों में धर्म,संस्कृति और स्मृतियों की टूटन की पीड़ा साफ सुनाई देती है। क्राउड फाउंडेशन की बड़ी पहल मंदिर जीर्णोद्धार राष्ट्र अभियान की देशव्यापी घोषणा। क्राउड फाउंडेशन के संस्थापक अरबिंद कुमार सिंह कहते हैं मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं यह हमारी सभ्यता की धड़कन हैं। इन्हें बचाना राष्ट्रधर्म है। यह समय है कि देश इनके लिए खड़ा हो। सर्वेक्षण के अनुसार-50,000 मंदिरों में बिजली व्यवस्था अत्यंत खतरनाक स्तर पर,हजारों ऐतिहासिक मंदिरों में न समिति है,न देखरेख,कई निर्मित संरचनाएं तुरंत मरम्मत न होने पर गिर सकती हैं। पहला चरण-10,000 सबसे क्षतिग्रस्त मंदिरों का त्वरित पुनर्निर्माण। अभियान में निमंत्रण-श्रद्धालु,NRI भारतीय,सामाजिक व धार्मिक संस्थाएं,कॉर्पोरेट CSR,राज्य सरकारें एवं स्थानीय निकाय,युवा स्वयंसेवक। हर छोटा सहयोग एक मंदिर को नया जीवन दे सकता है यही इस अभियान की भावना है। सर्वे के अनुसार अनुमानित आवश्यकता-रुपए 1,000 करोड़ बुनियादी मरम्मत,रुपए 4,000 करोड़ मध्यम स्तर का पुनर्निर्माण,रुपए 10,000 करोड़-धरोहर-स्तर संरक्षण। यह पैसा खर्च नहीं-भारत की 5,000 वर्ष पुरानी आत्मा में निवेश है। अभियान के प्रमुख कार्य-शिखर,दीवारें और छत की मरम्मत,जल रिसाव और नमी हटाना,सुरक्षित विद्युत व्यवस्था,गर्भगृह एवं मूर्ति आसन की मजबूती,स्वच्छता,रंग-सज्जा और रोशनी,पहुंच मार्ग एवं परिसर का सौंदर्यीकरण,पारदर्शी फोटो/वीडियो अपडेट। आज भारत के मंदिर मौन होकर देश से कह रहे हैं हमने तुम्हें अनगिनत बार संभाला है,अब हमें संभाल लो। अगर आज कदम न उठाया गया तो आने वाली पीढ़ियां प्रश्न करेंगी,जब हमारी धरोहरें ढह रही थीं,तब आप कहां थे। कैसे करें सहयोग-स्वयंसेवा-साझेदारी या दान हेतु संपर्क-9006372781 यह सिर्फ एक अभियान नहीं-भारत की संस्कृति,आस्था और पहचान को बचाने का राष्ट्रव्यापी संकल्प है।