धरीगांव की अनदेखी टूटी सड़कें और पेयजल संकट के साथ लचर व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल–डॉ.ओमप्रकाश नौटियाल

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड खिर्सू के अन्तर्गत धरीगांव ग्राम पंचायत ढिकवालगांव पिछले कई वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। शासन-प्रशासन की ओर से

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड खिर्सू के अन्तर्गत धरीगांव ग्राम पंचायत ढिकवालगांव पिछले कई वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। शासन-प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण का बजट स्वीकृत होने के बावजूद आज तक सड़कें अधूरी और जर्जर स्थिति में पड़ी हैं। डामरीकरण का कार्य राजनीतिक लाभ-हानि में उलझ गया और गांव की मुख्य कच्ची सड़कों पर फैले बड़े-बड़े पत्थर ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा रहे हैं। आए दिन वाहन फिसल रहे हैं और चालक गंभीर चोटों का शिकार हो रहे हैं। सुरक्षित आवागमन का सपना ग्रामीणों के लिए आज भी दूर की कौड़ी है। गांव में सिंचाई जल की भारी कमी है। बार-बार की शिकायतें मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंचाई गईं,मगर हालात जस के तस हैं। लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। पंपिंग योजना का पानी कभी आता है कभी नही। खेत सूख रहे हैं और किसान वर्षा के भरोसे खेती करने को मजबूर हैं। पेयजल स्थिति भी उतनी ही भयावह है। वर्षों पुरानी पेजल लाइन दब चुकी है,जिससे एक बूंद पानी पाने तक के लिए ग्रामीणों को संघर्ष करना पड़ रहा है। महिलाओं की दैनिक दिनचर्या पानी ढोने की मजबूरी में तब्दील होती जा रही है। ग्रामीण लगातार मांग कर रहे हैं कि पेयजल लाइन की मरम्मत की जाए ताकि स्वच्छ पानी गांव तक पहुंच सके। गांव में जगह-जगह रास्ते टूटें हुए हैं और पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके है,जो छोटे-बड़े हादसों को आमंत्रित कर रही है। इनकी मरम्मत के अभाव में खेत धस रहे हैं और पुरानी कृषि भूमि नष्ट हो रही है। भूमिस्खलन का खतरा भी दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। गांव में रेशम विभाग द्वारा बनाया गया भवन वर्षों से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। यह भवन उपयोग से पहले ही जर्जर हो चुका है। अधिकारियों को इसकी स्थिति की जानकारी थी,पर कार्रवाई कभी नहीं हुई। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब भवन निर्माण में खामियां शुरू से स्पष्ट थीं,तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई। सरकार कब लेगी ठोस पहल,ग्रामीणों का कहना है कि समस्याएं सुनने में तो सभी तत्पर रहते हैं,लेकिन समाधान की दिशा में कदम उठाने वाला कोई नहीं। धरीगांव विकास की मुख्यधारा से लगातार कटता जा रहा है। सड़कें टूटी हैं,पानी के लिए हाहाकार है,कृषि भूमि नष्ट हो रही है और सरकारी भवन खंडहर। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार और विभागीय अधिकारी गांव की आवाज सुनेंगे,क्या उपेक्षा की यह श्रृंखला कभी खत्म होगी,गांव के लोग कहते हैं,हम सरकार से लड़ना नहीं चाहते,हम सिर्फ अपने बुनियादी अधिकार चाहते हैं। सड़क,पानी और सुरक्षा इन तीनों की व्यवस्था यदि ईमानदारी से हो जाए,तो हमारा गांव फिर से जी उठेगा।

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