
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बाल विकास परियोजना कल्जीखाल के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र जसपुर में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत बालिका जन्मोत्सव कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवजात बेटियों के जन्म को सम्मानित करना,समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को मजबूत करना तथा महिलाओं-बालिकाओं के अधिकारों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में पहुंचे ग्रामीण और माता-पिता एवं महिलाओं ने बेटियों के जन्म का प्रतीकात्मक स्वागत कर यह संदेश दिया कि बेटी बोझ नहीं,बल्कि परिवार की शक्ति,समृद्धि और भविष्य की धुरी है। बाल विकास परियोजना अधिकारी सुषमा रावत ने कहा कि समाज में बेटे और बेटियों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव आधुनिक सोच के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि बेटी केवल परिवार की शान ही नहीं,बल्कि भविष्य की आधारशिला भी है। भ्रूण हत्या रोकना,बेटियों को पढ़ाना और उन्हें सुरक्षित वातावरण देना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए ग्रामीणों को प्रेरित किया कि वे अपनी बेटियों को शिक्षा,स्वास्थ्य और सभी अवसरों में बराबरी दिलाने के लिए आगे आएं। परियोजना सुपरवाइजर सुनीता तोपवाल ने पोषण अभियान एवं महिला-सशक्तिकरण से जुड़ी अन्य विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने संतुलित पोषण,टीकाकरण,एनीमिया मुक्त भारत अभियान तथा आंगनबाड़ी सेवाओं के महत्व पर ग्रामीणों को जागरूक किया। कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह रहा जब आंगनबाड़ी केंद्र की लाभार्थी सोनिका देवी और प्रियंका देवी की नवजात बेटियों कार्तिका व आदविका को सम्मानित किया गया। उन्हें उपहार प्रदान कर समाज में यह संदेश दिया गया कि हर बेटी उत्सव की हकदार है,सम्मान की अधिकारी है। कार्यक्रम में कनिष्ठ सहायक महाराज सिंह रावत,आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री हेमलता देवी,सहायिका सुषमा देवी,ग्राम प्रधान जसपुर कलावती देवी सहित समस्त ग्रामवासी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार बालिका जन्मोत्सव कार्यक्रम न केवल नवजात बेटियों को सम्मान देने का प्रयास रहा,बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और समानता की भावना को मजबूत बनाने का सराहनीय प्रयास भी रहा।