उत्तराखंड विद्वत सभा की प्रांतीय गोष्ठी में विद्वानों का महाकुंभ

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की समृद्ध वैदिक,ज्योतिषीय एवं सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ दिशा देने की दिशा में उत्तराखंड विद्वत सभा द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की समृद्ध वैदिक,ज्योतिषीय एवं सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ दिशा देने की दिशा में उत्तराखंड विद्वत सभा द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में आगामी 20 दिसंबर को देहरादून के जीएमएस रोड स्थित साई गेस्ट हाउस में एक दिवसीय उच्च स्तरीय प्रांतीय ज्योतिषीय विचार-विमर्श गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है,जिसमें शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक एवं प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ.चंडी प्रसाद घिल्डियाल अति विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। उत्तराखंड विद्वत सभा के प्रांतीय अध्यक्ष आचार्य हर्षपति गोदियाल एवं महासचिव अक्षत डबराल द्वारा भेजे गए आमंत्रण पत्र में बताया गया है कि वर्ष 2026 में देशभर में मनाए जाने वाले व्रतों एवं त्योहारों की तिथियों को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम या मतभेद न रहे,इसी उद्देश्य से यह विचार-मंथन आयोजित किया जा रहा है। गोष्ठी का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि एक ही त्योहार दो-दो दिन मनाने जैसी स्थिति से आमजन को भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। आमंत्रण पत्र के अनुसार प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलने वाली इस गोष्ठी में उत्तराखंड राज्य के वेदांत,श्रीमद्भागवत एवं ज्योतिष के शीर्ष विद्वान गहन विचार-विमर्श करेंगे। विचार-विमर्श के उपरांत ही व्रत एवं त्योहारों की अधिकृत सूची सार्वजनिक की जाएगी। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सभी पंचांग कर्ताओं को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है,ताकि एक सर्वमान्य एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित निर्णय लिया जा सके। उत्तराखंड विद्वत सभा के सांस्कृतिक एवं संगठन सचिव आचार्य राजेश अमोली ने बताया कि डॉ.चंडी प्रसाद घिल्डियाल को दैवज्ञ के रूप में जाना जाता है और उनकी ख्याति उत्तराखंड ज्योतिष रत्न के रूप में न केवल प्रदेश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैली हुई है। संस्कृत शिक्षा जैसे विद्वानों के विभाग में सहायक निदेशक के रूप में उनका अनुभव एवं गहन शास्त्रीय ज्ञान इस गोष्ठी को विशेष ऊंचाई प्रदान करेगा। उनके मार्गदर्शन को लेकर विद्वानों एवं पंचांगकारों में विशेष उत्साह और प्रतीक्षा बनी हुई है। उत्तराखंड विद्वत सभा की यह प्रांतीय गोष्ठी न केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है,बल्कि यह आयोजन समन्वय,एकरूपता एवं जनहित की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।

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