148 दैनिक व नियत वेतन कर्मियों के मामले में बड़ा कदम-गढ़वाल विश्वविद्यालय में हाईकोर्ट आदेशों के अनुपालन को उच्च स्तरीय जांच समिति गठित

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में दैनिक एवं नियत वेतन पर कार्यरत 148 कर्मियों से जुड़े प्रकरण के निस्तारण को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में दैनिक एवं नियत वेतन पर कार्यरत 148 कर्मियों से जुड़े प्रकरण के निस्तारण को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने इस प्रकरण की विस्तृत जांच एवं समाधान के लिए उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.राकेश कुमार ढोड़ी द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। अधिसूचना में बताया गया है कि उच्च न्यायालय में योजित वाद में पारित आदेशों के क्रम में दैनिक एवं नियत वेतन पर कार्यरत कर्मियों को न्यूनतम वेतन एवं समय-समय पर देय महंगाई भत्ता दिए जाने से संबंधित प्रकरण की समग्र समीक्षा एवं निस्तारण हेतु यह समिति गठित की गई है। जारी अधिसूचना के अनुसार गठित जांच समिति में यूसिक विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.एन.एस.पंवार को अध्यक्ष नामित किया गया है। वहीं समिति में देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संस्थानों से जुड़े अनुभवी अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इनमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग,नई दिल्ली के वित्त एवं संपरीक्षा विभाग से सेवानिवृत्त उप-निदेशक रमेश चंद्र भट्ट,दिल्ली विश्वविद्यालय के आंतरिक संपरीक्षा अधिकारी एवं संयुक्त कुलसचिव पद से सेवानिवृत्त टी.वेंगादेशन,दिल्ली विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव प्रशांत कुमार तथा विश्वविद्यालय के विधिक सहायक कुलसचिव को सदस्य बनाया गया है। जबकि सहायक कुलसचिव,कुलपति सचिवालय को समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा समिति को निर्देशित किया गया है कि वह यथाशीघ्र बैठक आयोजित कर सभी तथ्यों,न्यायालयीय आदेशों एवं नियमों का परीक्षण करते हुए अपनी विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करे,ताकि 148 कर्मियों से जुड़े इस लंबे समय से लंबित प्रकरण का न्यायसंगत एवं विधिसम्मत समाधान सुनिश्चित किया जा सके। विश्वविद्यालय में इस निर्णय को पारदर्शिता और न्यायिक आदेशों के सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। संबंधित कर्मियों में भी समिति गठन के बाद प्रकरण के शीघ्र समाधान की उम्मीद जगी है।

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