ठंड में राहत-शिक्षा में संवेदना राजकीय इंटर कॉलेज श्रीनगर में निर्धन छात्र निधि से 20 छात्र-छात्राओं को स्वेटर वितरण

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। सरकारी विद्यालय केवल ज्ञान का केंद्र ही नहीं,बल्कि सामाजिक संवेदनाओं के सशक्त वाहक भी होते हैं-इस कथन को राजकीय इंटर कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल ने एक बार फिर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। सरकारी विद्यालय केवल ज्ञान का केंद्र ही नहीं,बल्कि सामाजिक संवेदनाओं के सशक्त वाहक भी होते हैं-इस कथन को राजकीय इंटर कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल ने एक बार फिर चरितार्थ किया। विद्यालय में निर्धन छात्र निधि के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर 20 छात्र-छात्राओं को स्वेटर वितरित किए गए,जिससे शीत ऋतु में उन्हें राहत के साथ आत्मसम्मान और अपनत्व का भाव भी प्राप्त हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के पीटीए अध्यक्ष कुशलानाथ,प्रधानाचार्य सरोज सिंह मेहरा,विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम सादगीपूर्ण वातावरण में,लेकिन गहरी संवेदनशीलता के साथ सम्पन्न हुआ। पीटीए अध्यक्ष कुशलानाथ ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों की मूलभूत आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को सहयोग देना केवल दान नहीं,बल्कि सामाजिक दायित्व है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन द्वारा उठाए गए इस कदम को अत्यंत सराहनीय बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार की छात्रहितकारी पहल जारी रखने की बात कही। विद्यालय के प्रधानाचार्य सरोज सिंह मेहरा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह स्वेटर वितरण कार्यक्रम निर्धन छात्र निधि के साथ-साथ अन्य निधियों से प्राप्त ब्याज राशि के समुचित उपयोग से सम्पन्न किया गया है। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है,बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार की पहल से छात्रों का मनोबल बढ़ेगा और वे और अधिक लगन से अध्ययन कर सकेंगे। स्वेटर प्राप्त कर छात्र-छात्राओं के चेहरों पर प्रसन्नता स्पष्ट दिखाई दी। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहयोग से उन्हें ठंड से राहत मिली है और पढ़ाई के प्रति उत्साह भी बढ़ा है। विद्यालय प्रबंधन की इस पहल की अभिभावकों एवं शहरवासियों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसे मानवीय संवेदना और शिक्षा के प्रति जिम्मेदार सोच का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

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