
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता,मौलिकता एवं समाजोपयोगिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक दिवसीय शोधार्थी कौशल विकास कार्यशाला (द्वितीय संस्करण) का सफल एवं प्रभावशाली आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन डॉ.अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र तथा संस्थागत नवाचार परिषद द्वारा प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ,जिसे प्रो.एम.एस.पंवार अधिष्ठाता (भर्ती एवं पदोन्नति) हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय भगवती प्रसाद राघव क्षेत्र संयोजक,प्रज्ञा प्रवाह (उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश) तथा डॉ.कविता भट्ट,दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा संयुक्त रूप से संपन्न किया गया। उद्घाटन सत्र में गुणवत्तापूर्ण,नैतिक एवं समाजोपयोगी अनुसंधान के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। अपने उद्बोधन में प्रो.एम.एस.पंवार ने शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे शोध कौशल को निरंतर विकसित करें तथा श्रेष्ठ अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि शोध तभी सार्थक है,जब वह समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जुड़ा हो। डॉ.कविता भट्ट ने भारतीय शोध दृष्टि के दार्शनिक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा मौलिकता,नैतिकता एवं समग्र दृष्टिकोण पर आधारित रही है। उन्होंने भारतीय चिंतन और मूल्यों को आधुनिक शोध से जोड़ने पर बल दिया। कार्यशाला के दौरान शोधार्थियों के व्यावहारिक कौशल विकास हेतु अनेक विशेषज्ञ सत्रों का आयोजन किया गया। डॉ.रोहित महर ने अकादमिक लेखन एवं आधुनिक अनुसंधान उपकरणों पर व्याख्यान दिया,जिसमें साहित्यिक चोरी जांच उपकरण,आंकड़ा विश्लेषण सॉफ्टवेयर,गूगल शोध खोज मंच,शोध नेटवर्क मंच,गणनात्मक विश्लेषण सॉफ्टवेयर,रासायनिक संरचना आरेखन सॉफ्टवेयर एवं व्यावसायिक सामाजिक मंच जैसे माध्यमों के प्रयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। डॉ.बलकृष्ण बधानी ने संस्कृत भाषा की भारतीय ज्ञान परंपरा में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए दर्शन,विज्ञान,साहित्य एवं शिक्षा में इसके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। डॉ.आशीष बहुगुणा ने शोधार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोधवृत्ति एवं अनुदान योजनाओं की जानकारी दी,जिनमें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद,भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद,भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद,भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद,महिला शोधवृत्ति योजनाएं,नवाचार आधारित उद्यम योजनाएं,प्रशिक्षण योजनाएं तथा उत्तराखंड सरकार की छात्रवृत्तियां प्रमुख रहीं। डॉ.वरुण बर्थवाल ने अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर सत्र प्रस्तुत किया,जिसमें पाइथन प्रोग्रामिंग,मशीन आधारित अधिगम,वृहद भाषा मॉडल तथा आंकड़ा विश्लेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला का एक विशेष एवं महत्वपूर्ण सत्र प्रज्ञा प्रवाह के भगवती प्रसाद राघव द्वारा संबोधित किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता पर बल देते हुए शोधार्थियों से भारतीय दृष्टिकोण से अनुसंधान करने तथा राष्ट्र निर्माण में अपने बौद्धिक योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के आधुनिक संदर्भों में प्रयोग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ.मनीष उनियाल (भौतिकी विभाग) ने की तथा डॉ.प्रकाश कुमार सिंह (डॉ.अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र) सहसत्राध्यक्ष रहे। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ.विनीत मौर्य (सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग) ने की एवं डॉ.अरविंद सिंह सहसत्राध्यक्ष रहे। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से 60 से अधिक शोधार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन प्रश्न-उत्तर सत्र एवं प्रतिभागियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय एवं सहयोगी संस्थाओं के अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे। यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा,आधुनिक अनुसंधान तकनीकों एवं नैतिक शोध दृष्टि का सशक्त समन्वय प्रस्तुत करती हुई गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोध परिवेश को नई दिशा देने वाली सिद्ध हुई।