नव वर्ष 2026 नशे के अंधकार से उजाले की ओर उत्तराखंड-युवा अपनी ऊर्जा नशे में नहीं राष्ट्र निर्माण में लगाएं–डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। नव वर्ष केवल तारीख बदलने का अवसर नहीं,बल्कि समाज की सोच और दिशा बदलने का संकल्प होता है। जब नया वर्ष आत्मचिंतन और सकारात्मक निर्णयों के साथ

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। नव वर्ष केवल तारीख बदलने का अवसर नहीं,बल्कि समाज की सोच और दिशा बदलने का संकल्प होता है। जब नया वर्ष आत्मचिंतन और सकारात्मक निर्णयों के साथ शुरू हो,तभी उसका वास्तविक अर्थ सिद्ध होता है। इसी भाव के साथ गढ़वाल मण्डलीय नशा उन्मूलन नोडल अधिकारी शिक्षा विभाग उत्तराखंड डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला ने नव वर्ष 2026 पर प्रदेशवासियों से नशामुक्त,स्वस्थ और खुशहाल उत्तराखंड के निर्माण का सशक्त आह्वान किया है। डॉ.चमोला ने प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नया साल तभी सार्थक होगा,जब समाज विशेषकर युवा वर्ग नशे से दूर रहकर संकल्प,अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा को अपने जीवन का आधार बनाए। उन्होंने कहा कि नशा नहीं,संकल्प युवाओं की पहचान बने,क्योंकि युवा ही किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति और भविष्य होते हैं। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से युवा नशीले पदार्थों की ओर आकर्षित हो रहे हैं,वह हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है। नशा केवल व्यक्ति को नहीं,बल्कि उसके परिवार,सामाजिक ताने-बाने और राष्ट्र की प्रगति को भी नुकसान पहुंचाता है। यह एक ऐसी सामाजिक बीमारी है,जो धीरे-धीरे समाज को भीतर से खोखला कर देती है। डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशा उन्मूलन केवल प्रशासन या कानून से संभव नहीं है। इसके लिए परिवार,विद्यालय और समाज-तीनों को समान रूप से जिम्मेदारी निभानी होगी। परिवार को बच्चों में संस्कार और संवाद स्थापित करना होगा,विद्यालयों को शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और जीवन कौशल को विकसित करना होगा,जबकि समाज को युवाओं के लिए सकारात्मक वातावरण और स्वस्थ विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। उन्होंने कहा कि जब माता-पिता,शिक्षक और समाज एकजुट होकर युवाओं को सही दिशा देंगे,तभी नशे जैसी बुराई पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाएगा। युवाओं के सामने अपने आचरण से आदर्श प्रस्तुत करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। डॉ.चमोला ने कहा कि नव वर्ष 2026 नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का वर्ष बने। यह समय केवल भाषणों और औपचारिकताओं का नहीं,बल्कि व्यवहार में बदलाव लाने का है। नशा उन्मूलन अभियान को सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर जन-आंदोलन का रूप देना होगा। उन्होंने आह्वान किया कि हर घर,हर गांव और हर मोहल्ले से नशा मुक्ति की आवाज उठे। युवाओं को देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों,वीर सैनिकों और समाज सुधारकों के प्रेरक प्रसंगों से जोड़कर उनमें राष्ट्रप्रेम,अनुशासन और आत्मबल का विकास किया जाए। इस अवसर पर उन्होंने नशा मुक्त जीवन के लिए 10 संकल्प लेने का भी आह्वान किया,जिनमें नशे से दूर रहना,स्वस्थ जीवनशैली अपनाना,सकारात्मक सोच,पारिवारिक व सामाजिक संबंधों को मजबूत करना,नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना और नशे के खिलाफ निरंतर संघर्ष शामिल है। अपने संदेश के अंत में डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला ने कहा स्वस्थ युवा ही सशक्त उत्तराखंड की असली पहचान हैं। जब हमारा युवा शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होगा,तभी हमारा प्रदेश वास्तव में समृद्ध और खुशहाल बनेगा। आइए हम सभी मिलकर अपने घर,गांव,शहर और राज्य को नशामुक्त बनाने का संकल्प लें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक संकल्प,सतत प्रयास और सामाजिक सहभागिता से उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाना निश्चित रूप से संभव है।

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