आंग्ल नववर्ष 2026 बेहतरी, संवेदना व प्रकृति-समर्पण का वर्ष बने: डॉ. कमल किशोर डुकलान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। आंग्ल नववर्ष केवल कैलेंडर बदलने का नाम नहीं है,बल्कि यह आत्ममंथन,नई उम्मीदों और नई ऊर्जा के संचार का अवसर भी है। बीता वर्ष हमें जहां भविष्य के

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। आंग्ल नववर्ष केवल कैलेंडर बदलने का नाम नहीं है,बल्कि यह आत्ममंथन,नई उम्मीदों और नई ऊर्जा के संचार का अवसर भी है। बीता वर्ष हमें जहां भविष्य के लिए संकल्प लेने को प्रेरित करता है,वहीं वह सिंहावलोकन के रूप में अतीत की गलतियों,अनुभवों और सीख की ओर भी संकेत करता है। प्रत्येक देशवासी यदि किसी बुराई के बजाय अच्छाई का अनुकरण करे,तो मानवता के पैमाने पर हम एक आदर्श समाज की स्थापना कर सकते हैं। बहुप्रतीक्षित आंग्ल नववर्ष 2026 का स्वागत ऐसे समय में हो रहा है,जब ईसवी सन् 2025 एक बोझिल और चुनौतीपूर्ण वर्ष के रूप में स्मृतियों में दर्ज हो रहा है। अत्यधिक शीतलहर,धूल,कोहरा और बादलों की चादर में कई स्थानों पर सूर्य के दर्शन दुर्लभ रहे। भले ही धूप न खिली हो,लेकिन स्याह रात के बाद फैला उजास इस बात का प्रमाण है कि सूर्य अस्तित्व में है। यही स्थिति हमारे सामाजिक और नैतिक जीवन की भी रही-जहां धूल,कोहरा और बादल हमारी नाकामियों को ढकते रहे। इसलिए 2025 को केवल बीता हुआ वर्ष मानकर नहीं,बल्कि आत्मविश्लेषण के विषय के रूप में देखना होगा। ईसवी सन् 2026 का सूर्योदय एक नए अध्याय को लिखने का अवसर है। यह समय है बीते वर्ष की गलतियों,अफसोस और बाधाओं को समझकर नए अवसरों की ओर बढ़ने का। नई शुरुआत तभी सार्थक होती है,जब वह पुरानी जड़ों से जुड़ी हो। हर चुनौती के बाद आने वाला क्षण नई शुरुआत की चाबी देता है। जब यह अनुभूति दृढ़ हो जाती है कि हर पल हमें फिर से शुरू करने का अवसर देता है,तो निराशा कम होती है और जीवन में उत्साह का संचार होता है। बीते वर्ष के ऋतु चक्र पर नजर डालें तो ग्रीष्म ऋतु में 52 डिग्री से अधिक तापमान झेलना पड़ा,वहीं वर्षाकाल में भूस्खलन,बाढ़ और मार्ग अवरुद्ध होने जैसी आपदाओं ने जनजीवन को प्रभावित किया। जलवायु परिवर्तन के इस निर्णायक समय में हमें प्रकृति के ऋण को समझना और उसे चुकाना होगा। आओ पेड़ लगाएं,जल है तो कल है,धरती मेरी मां,मैं धरती का पुत्र-ये केवल नारे नहीं,बल्कि धरातल पर दिखाई देने चाहिए। हवा,जल और आकाश से हमें जो नि:शुल्क जीवन और स्नेह मिलता है,उसके बदले हमने प्रकृति को क्या दिया,क्या हमने केवल लेना और छीनना ही सीखा है। ईसवी सन् 2026 प्रकृति के प्रति अपने दायित्व को निभाने का वर्ष बनना चाहिए। हमें तय करना होगा कि हम समस्या का हिस्सा हैं या समाधान का माध्यम। आंग्ल नववर्ष 2026 मनुष्य की प्रवृत्ति और प्रकृति-दोनों को समझने का वर्ष होना चाहिए। इससे पहले कि कोई और हमारे लिए फैसले ले,हमें अपनी बेहतरी के लिए स्वयं निर्णय लेने होंगे। यह भी सोचना होगा कि हमारी बेहतरी कहीं किसी और के दुख-दर्द का कारण तो नहीं बन रही। आज संसाधनों की कमी से अधिक कमी संवेदनशील और मानवीय व्यवहार की है। विपदा के समय हमने कैसा व्यवहार किया,हम किस तरह एक-दूसरे के काम आए-इन प्रश्नों पर विचार कर 2026 में सुधार की सीढ़ियां चढ़नी होंगी। अतीत से सीख लेकर किसी बुराई का नहीं,बल्कि अच्छाई का अनुकरण ही मानवता का मार्ग है। कोविड काल में हमने देखा कि किस प्रकार संकट के समय अमीर देश गरीब देशों से और संपन्न लोग अपने जरूरतमंद परिचितों से दूर होते चले गए। यह अकेलापन हमारे सामाजिक ताने-बाने की बड़ी कमजोरी बनकर सामने आया। उम्मीद की जानी चाहिए कि आंग्ल नववर्ष 2026 में इस कमी पर गंभीरता से विचार होगा और मानवीय संवेदना को पुनः केंद्र में लाया जाएगा। आशा है कि आंग्ल नववर्ष 2026 भारत की चौतरफा चुनौतियों का उत्तर देगा। सीमाओं पर सभ्यता और शालीनता लौटे,पड़ोसी देशों को यह समझ में आए कि आतंक और अशांति किसी का भला नहीं करते। बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत को केवल उपभोक्ता बाजार न समझें,बल्कि अपने सामाजिक दायित्वों का भी ईमानदारी से निर्वहन करें। विधि का उद्देश्य केवल कारोबार नहीं,बल्कि न्याय की सेवा हो-तभी शासन और प्रशासन का उदार एवं मानवीय स्वरूप सामने आएगा। वर्ष 2025 में देश ने कई बड़े और पीड़ादायक घटनाओं का सामना किया। प्रयागराज महाकुंभ में भारी भीड़ के कारण भगदड़,जम्मू-कश्मीर के बैसरन घाटी (पहलगाम) में पर्यटकों पर आतंकी हमला,अहमदाबाद में हुआ भयावह विमान हादसा-इन घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया। वहीं दूसरी ओर ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियानों ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति को भी प्रदर्शित किया। ये सभी घटनाएं हमें यह सिखाती हैं कि सुरक्षा,संवेदना और जिम्मेदारी-तीनों पर समान रूप से ध्यान देना होगा। यह भी आवश्यक है कि हम बीते वर्ष की अपनी खूबियों और खामियों का ईमानदारी से मूल्यांकन करें। कौन-सी कमजोरियां हमारी सफलता की राह में बाधा बनीं,यह पहचानकर 2026 में योजनाबद्ध तरीके से उन्हें दूर करने का प्रयास करें। कार्यकुशलता बढ़ाने और समय की पाबंदी अपनाने से आने वाला वर्ष निश्चित रूप से सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। अंततः यही कामना है कि आंग्ल नववर्ष 2026 देशवासियों की बेहतरी,प्रकृति-संरक्षण,सामाजिक संवेदना और मानवता के सशक्त आदर्शों का वर्ष बने।

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