कलश यात्रा संग पाटाखाल–मयाली में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। कीर्तिनगर विकासखंड के अंतर्गत हिंसरियाखाल स्थित पाटाखाल (मयाली) गांव में बुधवार को आध्यात्मिक श्रद्धा,सांस्कृतिक आस्था और सामाजिक समरसता के संगम के रूप में श्रीमद् भागवत कथा का

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। कीर्तिनगर विकासखंड के अंतर्गत हिंसरियाखाल स्थित पाटाखाल (मयाली) गांव में बुधवार को आध्यात्मिक श्रद्धा,सांस्कृतिक आस्था और सामाजिक समरसता के संगम के रूप में श्रीमद् भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस पावन अवसर पर गांव के प्राचीन एवं प्राकृतिक जल स्रोत से भव्य कलश यात्रा निकाली गई,जिसने सम्पूर्ण क्षेत्र को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। कलश यात्रा में क्षेत्र की महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सिर पर कलश धारण कर पूरे श्रद्धा भाव के साथ सहभागिता निभाई। जय श्रीकृष्ण,हरि बोल और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था की प्रतीक बनी,बल्कि लोक संस्कृति,सामाजिक एकता और सनातन परंपराओं की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती रही। गांव के मार्गों पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। कथा के शुभारंभ अवसर पर कथा व्यास आचार्य दीपक नौटियाल ने श्रीमद् भागवत महापुराण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं,बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली दिव्य प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मानव को सत्य,करुणा,सेवा और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करती है। आचार्य नौटियाल ने श्रद्धालुओं से बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करने,सामाजिक मर्यादाओं का पालन करने तथा भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में मन लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कलियुग में भागवत कथा श्रवण से मन,वाणी और कर्म तीनों की शुद्धि होती है तथा समाज में सद्भाव और सकारात्मकता का संचार होता है। इस धार्मिक आयोजन में गांव व क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे,जिनमें वाणी विलास उनियाल,रुकमा देवी,श्रीकृष्ण लखेड़ा,ललिता प्रसाद भट्ट,विजयराम जोशी,श्रीकांत चमोली,सुरेश प्रसाद,नवीन कुमार,विजेंद्र प्रसाद,दिनेश प्रसाद उनियाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे। सभी ने कथा आयोजन को क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक उन्नयन और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया। श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन से पाटाखाल (मयाली) क्षेत्र में न केवल धार्मिक वातावरण सुदृढ़ हुआ है,बल्कि सामाजिक एकजुटता,सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और भावी पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का भी संदेश प्रसारित हुआ है। आने वाले दिनों में कथा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालु भक्ति,ज्ञान और वैराग्य की अमृतधारा का रसपान करेंगे।

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