
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिल्ली के इंजीनियरिंग हाल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में प्रख्यात राज्य आंदोलनकारी जोगाराम द्वारा लिखित पुस्तक यादें का विधिवत विमोचन किया। समारोह में राज्य आंदोलनकारी,सामाजिक न्याय और उत्तराखंड निर्माण के संघर्षों की स्मृतियों को सजीव रूप में प्रस्तुत करने वाली इस पुस्तक को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में सराहा गया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जोगाराम को उत्तराखंड समाज का एक चमकदार और प्रेरणादायी व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि 87 वर्षीय जोगाराम केवल राज्य आंदोलनकारी ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील विचारक,समाज सुधारक और विकास के पुरोधा भी हैं। उन्होंने कहा कि जोगाराम ने जीवनभर उत्तराखंड के निर्माण,सामाजिक समानता और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। उनकी पुस्तक यादें न केवल व्यक्तिगत संस्मरण है,बल्कि उत्तराखंड के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास का एक संग्रहणीय दस्तावेज भी है। समारोह में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र गौतम,उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप,पूर्व आईएएस एवं समारोह के अध्यक्ष कृष्ण आर्य,कांग्रेस के पूर्व सैनिक सचिव हरिपाल रावत,वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी अनिल पेंट,कुशाल जीना,दाताराम चमोली,देव सिंह रावत,प्रताप थलवाल,सुरेंद्र हल्सी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन मां चंद राम द्वारा किया गया। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने जोगाराम को उत्तराखंड की प्रसिद्ध दलित परंपरा के महान नेताओं हरिप्रसाद टम्टा,बहादुर राम टम्टा और प्रदीप टम्टा की श्रेणी में एक नए क्रांतिकारी सदस्य के रूप में उल्लेखित किया। उन्होंने कहा कि जोगाराम का जीवन संघर्ष,साहस और सामाजिक चेतना का प्रतीक है। समारोह की अध्यक्षता कर रहे पूर्व आईएएस कृष्ण आर्य ने कहा कि जोगाराम पिछले लगभग एक शताब्दी से सामाजिक चेतना के साक्षी रहे हैं। जब से उन्होंने जीवन को समझा,तब से लेकर आज तक उन्होंने कमजोर,वंचित और बेजुबान वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई है और अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय की लड़ाई में समर्पित किया है। समारोह में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पुस्तक यादें आने वाली पीढ़ियों के लिए उत्तराखंड आंदोलन,सामाजिक संघर्षों और समर्पण की प्रेरक गाथा के रूप में मार्गदर्शक बनेगी। यह कृति न केवल इतिहास को संजोने का कार्य करती है,बल्कि समाज को आत्ममंथन और संघर्ष की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती