
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की बेटियां आज प्रतिभा,परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर हर क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रही हैं। इसी गौरवशाली क्रम में श्रीनगर की तीन होनहार बेटियों में अस्मिता,हर्षिता रावत और तनिष्का कोठियाल ने 10 मीटर राइफल शूटिंग में नेशनल क्वालिफाई कर न केवल अपने परिवार,विद्यालय और प्रशिक्षकों का नाम रोशन किया है,बल्कि पूरे श्रीनगर क्षेत्र को गर्व से भर दिया है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 68 वीं नेशनल 10 मीटर राइफल शूटिंग प्रतियोगिता-2025 में तीनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर के लिए क्वालिफिकेशन हासिल किया। सीमित संसाधनों,कम समय और कठिन अभ्यास के बावजूद इन बेटियों की यह उपलब्धि उनके अनुशासन,अटूट मेहनत और मजबूत इरादों का जीवंत प्रमाण है। अस्मिता सरस्वती विद्या मंदिर श्रीकोट में कक्षा 11 वीं की छात्रा हैं। उन्होंने प्रतियोगिता में अपने सटीक निशाने और आत्मविश्वास से सभी का ध्यान आकर्षित किया। वहीं हर्षिता रावत श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल श्रीनगर की कक्षा 11 वीं की छात्रा हैं जो मात्र 8 महीनों से हिल शूटिंग एकेडमी में नियमित अभ्यास कर रही हैं। अल्प समय में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचकर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। इसके साथ ही तनिष्का कोठियाल कान्वेंट स्कूल की कक्षा 12 वीं की छात्रा जो करीब 10 महीनों से निरंतर अभ्यासरत हैं,ने नेशनल क्वालिफिकेशन हासिल कर यह सिद्ध कर दिया कि लगन,समर्पण और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। हिल शूटिंग एकेडमी के प्रशिक्षक धीरेंद्र नेगी ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि तीनों बेटियों ने बेहद कम समय में अनुकरणीय मेहनत और अनुशासन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में ये खिलाड़ी न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी। इस ऐतिहासिक सफलता पर क्षेत्रवासियों,खेल प्रेमियों,शिक्षाविदों एवं सामाजिक संगठनों ने तीनों बेटियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे अन्य बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। श्रीनगर की यह उपलब्धि यह स्पष्ट संदेश देती है कि यदि बेटियों को सही अवसर,मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले,तो वे हर लक्ष्य को भेद सकती हैं। निस्संदेह,अस्मिता,हर्षिता और तनिष्का की यह सफलता “बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ और बेटी बढ़ाओ” की भावना को साकार करती हुई उत्तराखंड के खेल इतिहास में एक प्रेरक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ रही है।