
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। जब कोई व्यक्ति निरंतर अपने लक्ष्य की ओर समर्पण भाव से आगे बढ़ता है तो सफलता स्वयं उसका वरण करती है। यह कथन अखिलेश चन्द्र चमोला के जीवन पर पूरी तरह साकार होता है। शिक्षा समाज सेवा और संस्कार निर्माण को अपना जीवन लक्ष्य बनाने वाले अखिलेश चन्द्र चमोला को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित भारत गौरव रत्न सम्मान प्रदान किया गया है। यह सम्मान न केवल उनके लिए बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय है। अखिलेश चन्द्र चमोला का जन्म एक जुलाई 1972 को जनपद रुद्रप्रयाग के ग्राम कौशलपुर में हुआ। साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने शिक्षा और संस्कारों के बल पर असाधारण पहचान बनाई। उन्होंने इंटरमीडिएट की शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज बसुकेदार से प्राप्त की। इसके बाद कला स्नातक की उपाधि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि से हासिल की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल का रुख किया जहां कला निष्णात में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर स्वर्ण पदक से सम्मानित हुए। यह उपलब्धि उनकी मेधा और परिश्रम का प्रमाण है। बचपन से ही अखिलेश चन्द्र चमोला का सपना रहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की छिपी प्रतिभाओं को मंच मिले और युवा पीढ़ी नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहे। इसी संकल्प के साथ उन्होंने वर्ष 1998 में बाल प्रतिभा सम्मान समारोह परिषद की स्थापना की। बीते 27 वर्षों से वे निरंतर ग्रामीण छात्र छात्राओं को सम्मानित कर उनका आत्मविश्वास बढ़ा रहे हैं और उन्हें जीवन में कभी नशा न करने की प्रेरणा दे रहे हैं। उनके इसी समर्पण को देखते हुए शिक्षा विभाग उत्तराखंड ने उन्हें गढ़वाल मंडल का नशा उन्मूलन प्रभारी भी नियुक्त किया। शिक्षा के साथ साथ अखिलेश चन्द्र चमोला का साहित्यिक योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। नैतिक बोध कथाएं शैक्षिक नवाचार भारतीय संस्कृति तथा नैतिक ऊर्जा के आयाम जैसी पुस्तकें प्रकाशित होकर समाज को दिशा दे रही हैं। बिक्रम शिला हिन्दी विद्यापीठ गांधी नगर द्वारा उन्हें उत्तराखंड से विद्वत परिषद का मनोनीत सदस्य बनाया गया जो उनकी विद्वता की राष्ट्रीय पहचान है। सम्मानों की दृष्टि से भी उनका व्यक्तित्व अत्यंत समृद्ध है। भारत गौरव रत्न 2025 के अतिरिक्त उन्हें शिक्षा शिल्पी,शिक्षा रत्न,शिक्षक भूषण,उत्कृष्ट शिक्षक,मुख्यमंत्री सम्मान,राज्यपाल पुरस्कार,अंतरराष्ट्रीय शिक्षक सम्मान सहित एक हजार से अधिक राष्ट्रीय सम्मानोपाधियां प्राप्त हो चुकी हैं। मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी फरीदाबाद,बिक्रम शिला हिन्दी विद्यापीठ गांधी नगर तथा सहारा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा उन्हें पीएचडी और डी लिट की मानद उपाधियों से भी अलंकृत किया गया है। हाल ही में अरुणाभा वेलफेयर सोसाइटी फरीदाबाद द्वारा आयोजित भव्य समारोह में उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। संस्था की अध्यक्षा चुडामणि डॉ.प्रणीता प्रभात ने कहा कि अखिलेश चन्द्र चमोला का शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान उनका समर्पण और समाज निर्माण में भूमिका देश के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्तमान में अखिलेश चन्द्र चमोला जनपद पौड़ी के विकासखंड खिर्सू स्थित राजकीय इंटर कॉलेज सुमाड़ी में वरिष्ठ हिन्दी अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो नीयत पवित्र हो और कर्म निरंतर हो तो साधारण व्यक्ति भी असाधारण ऊंचाइयों को छू सकता है।