
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय की गोद में बसे पाटाखाल-मयाली गांव में इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा,सांस्कृतिक चेतना और भक्ति रस की अनुपम धारा प्रवाहित हो रही है। शंखनाद,भजन-कीर्तन और राधे-राधे तथा हरे कृष्ण के जयघोष के बीच आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ने समूचे क्षेत्र को श्रद्धा और आस्था के सूत्र में पिरो दिया है। वाणी विलास उनियाल एवं अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार श्रीकृष्ण उनियाल की माता की पुण्य स्मृति में आयोजित इस कथा के छठवें दिवस पर दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा,बल्कि सामाजिक समरसता,सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। व्यास पीठ पर विराजमान आचार्य दीपक नौटियाल ने अपनी ओजस्वी,सरल एवं हृदयस्पर्शी वाणी से श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत के गूढ़ आध्यात्मिक तत्वों से परिचित कराया। छठवें दिवस उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं,रास लीला,गोपी-प्रेम,उद्धव-गोपी संवाद के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण और परम मित्र सुदामा के प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और प्रेरणादायी वर्णन किया। आचार्य नौटियाल ने कहा कि सुदामा-कृष्ण की मित्रता निष्काम प्रेम,त्याग और सच्ची भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है। सच्चा मित्र वही होता है जो विपत्ति में साथ दे और अहंकार से रहित हो। उन्होंने गोपी-प्रेम को आत्मा का परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण बताते हुए कहा कि ज्ञान से भी ऊंचा स्थान भक्ति का है,क्योंकि जहां निश्छल प्रेम होता है वहीं भगवान स्वयं वास करते हैं। साथ ही राजा परीक्षित और शुकदेव संवाद के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने जीवन की क्षणभंगुरता,वैराग्य और मृत्यु-बोध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो व्यक्ति मृत्यु को स्मरण में रखकर जीवन जीता है,वही सच्चे अर्थों में धर्म के मार्ग पर चलता है। कथा के दौरान पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु कृष्ण-भक्ति में पूर्णतः लीन नजर आए। अनेक प्रसंगों पर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं और भजन-कीर्तन के साथ संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। इस अवसर पर लक्ष्मोलेश्वर आश्रम के स्वामी अदैत्यानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को संस्कार,संयम और करुणा की दिशा देने वाली जीवन-दृष्टि है। ऐसे आयोजन सामाजिक चेतना को जागृत करते हैं। वहीं वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र गौड़ ने कहा कि पत्रकारिता और संस्कृति समाज की आत्मा हैं। जब स्मृति,श्रद्धा और सामाजिक सरोकार एक मंच पर आते हैं,तब ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। कथा के इस पावन अवसर पर लक्ष्मोलेश्वर आश्रम के स्वामी अदेत्यानंद महाराज,पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विपिन मैठाणी,वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र गौड़,राजेन्द्र बड़थ्वाल,अनूप बहुगुणा,गबर सिंह भण्डारी,प्रकाश लाल हिचकलानी,कार्तिक बहुगुणा,सत्यप्रसाद बडोनी,हृदय राम कोटनाला,सुरेश उनियाल,मोहनलाल,रमेश प्रसाद कुकसाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे। ग्रामीण अंचल में आयोजित यह श्रीमद् भागवत कथा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता,सांस्कृतिक संरक्षण और नैतिक मूल्यों के संवर्धन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी। पाटाखाल-मयाली में आयोजित यह आयोजन क्षेत्रवासियों के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया।