
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक,साहित्यिक एवं आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अटल भारतीय हिंदू फाउंडेशन ने नितीश चन्द्र खंडूरी (आचार्य दिव्यानंद महाराज) को साहित्य,संगीत एवं संस्कृति प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड के पद पर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय शीर्ष नेतृत्व द्वारा की गई है। उल्लेखनीय है कि आचार्य दिव्यानंद महाराज जनपद पौड़ी गढ़वाल की इड्वालस्यू पट्टी के ग्राम क्विराली के मूल निवासी हैं। उनके इस दायित्व से न केवल पौड़ी गढ़वाल बल्कि समूचे उत्तराखंड में हर्ष और गौरव का वातावरण है। नियुक्ति के पश्चात आचार्य दिव्यानंद महाराज ने राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह दायित्व उनके लिए केवल एक पद नहीं,बल्कि सेवा,साधना और राष्ट्रधर्म का पवित्र अवसर है। उन्होंने कहा कि संगठन ने जिस विश्वास के साथ उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है,उस पर खरा उतरने के लिए वे पूरी निष्ठा,ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य संगठन की नीतियों,विचारधारा और सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। साथ ही देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक,सांगीतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित,प्रचारित एवं पुनर्जीवित करना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा। आचार्य दिव्यानंद महाराज ने कहा कि आज के समय में युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति,संस्कार और राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। साहित्य,संगीत और संस्कृति ऐसे सशक्त माध्यम हैं,जिनके द्वारा समाज को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन के माध्यम से वे जनसेवा,सांस्कृतिक जागरण एवं राष्ट्रहित के कार्यों को निरंतर गति देंगे। अटल भारतीय हिंदू फाउंडेशन द्वारा की गई यह नियुक्ति उत्तराखंड में सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करने वाली मानी जा रही है। संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं,बुद्धिजीवियों एवं संत-समाज ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि आचार्य दिव्यानंद महाराज के नेतृत्व में प्रदेश में साहित्य,संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में नवीन,सकारात्मक और प्रभावशाली कार्य होंगे। फाउंडेशन का उद्देश्य राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति,सनातन परंपरा और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना है। इसी कड़ी में यह नियुक्ति एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है,जो देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाएगी। यह दायित्व मेरे लिए जनसेवा और राष्ट्रसेवा का संकल्प है,जिसे मैं पूर्ण निष्ठा के साथ निभाऊंगा। आचार्य दिव्यानंद महाराज (नितीश चन्द्र खंडूरी)