श्रीनगर में लोकपर्व उत्तरायणी की मकर संक्रांति पर अनुकरणीय खिचड़ी प्रसाद सेवा

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। जब सूर्य उत्तरायण होता है और लोकआस्था के दीप घर-घर जल उठते हैं,तब उत्तराखंड की धरती पर सेवा,समर्पण और समरसता का उत्सव मनाया जाता है। लोकपर्व उत्तरायणी

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। जब सूर्य उत्तरायण होता है और लोकआस्था के दीप घर-घर जल उठते हैं,तब उत्तराखंड की धरती पर सेवा,समर्पण और समरसता का उत्सव मनाया जाता है। लोकपर्व उत्तरायणी मकर संक्रांति (खिचड़ी संग्रांद) केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं,बल्कि समाज को जोड़ने वाली जीवंत परंपरा है,जो मानवता और सद्भाव का संदेश देती है। इसी पावन भावभूमि पर देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी श्रीनगर गढ़वाल में उत्तरायणी पर्व के अवसर पर श्रद्धा और सेवा का सुंदर दृश्य देखने को मिला। नगर के विभिन्न हिस्सों में लोकपर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। नगर के प्रमुख वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली मार्ग पर स्थित दीपक रावत की टी-स्टाल पर दीपक सिंह रावत द्वारा खिचड़ी प्रसाद सेवा का आयोजन किया गया। प्रातः काल से ही श्रद्धालुओं,राहगीरों एवं नगरवासियों ने पंक्तिबद्ध होकर श्रद्धापूर्वक खिचड़ी प्रसाद ग्रहण किया। यह सेवा पूर्णतः निस्वार्थ भावना और लोकपरंपरा के अनुरूप संपन्न हुई। इस अवसर पर नगरवासियों ने कहा कि उत्तरायणी मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है,जो सकारात्मक ऊर्जा,नवचेतना और सामाजिक एकता का प्रतीक है। खिचड़ी संग्रांद के दिन सेवा और दान का विशेष महत्व होता है,और ऐसे आयोजन समाज में भाईचारे एवं सामूहिकता की भावना को मजबूत करते हैं। व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष बासुदेव कंडारी ने खिचड़ी प्रसाद सेवा की सराहना करते हुए कहा कि लोकपर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि दीपक सिंह रावत द्वारा की गई यह सेवा समाज के लिए प्रेरणास्रोत है,जो यह दर्शाती है कि छोटे प्रयास भी सामाजिक सौहार्द को नई दिशा दे सकते हैं। इस अवसर पर सूरज सिंह पंवार,अमित बड़थ्वाल,नीलम सिंह रावत,त्रिलोक सिंह रावत,अजीत पंवार,विक्रम सिंह मियां,कल्याण सिंह भण्डारी,दीपक डोभाल,जितेंद्र सिंह भण्डारी सहित अनेक नगरवासियों ने उपस्थित रहकर खिचड़ी प्रसाद की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। साथ ही गढ़वाल प्रिंटिंग प्रेस सहित अन्य प्रतिष्ठानों द्वारा भी इस सामाजिक पहल को सराहा गया। उत्तरायणी खिचड़ी संग्रांद के अवसर पर श्रीनगर गढ़वाल में की गई यह प्रसाद सेवा धार्मिक आस्था,लोकसंस्कृति और सामाजिक समरसता का ऐसा जीवंत उदाहरण बनी,जिसने देवभूमि की परंपराओं को एक बार फिर सशक्त रूप में सामने रखा।

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