सरस्वती वंदना,लोकस्वर और काव्य की त्रिवेणी में सराबोर हुआ श्रीनगर

हिमालय साहित्य एवं कला परिषद द्वारा वसंत पंचमी पर भव्य साहित्यिक-सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। बसंत की मादक बयार,सरस्वती वंदना की पवित्र स्वर-लहरियां और लोकसंस्कृति की मधुर धुनों

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हिमालय साहित्य एवं कला परिषद द्वारा वसंत पंचमी पर भव्य साहित्यिक-सांस्कृतिक संध्या का आयोजन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। बसंत की मादक बयार,सरस्वती वंदना की पवित्र स्वर-लहरियां और लोकसंस्कृति की मधुर धुनों से श्रीनगर का सांस्कृतिक वातावरण वसंत पंचमी के पावन अवसर पर पूरी तरह सराबोर हो उठा। ज्ञान,कला और सृजन की देवी मां सरस्वती की आराधना के इस शुभ पर्व पर हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद श्रीनगर द्वारा एक भव्य,गरिमामय एवं उल्लासपूर्ण साहित्यिक-सांस्कृतिक संध्या का आयोजन धूमधाम से किया गया। यह आयोजन न केवल साहित्य और लोकसंस्कृति का उत्सव बना,बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना को सशक्त स्वर देने वाला प्रभावी मंच भी सिद्ध हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफेसर उमा मैठाणी ने की। शुभारंभ मां सरस्वती को समर्पित वंदनाओं एवं भक्ति गीतों से हुआ,जिसने पूरे सभागार को आध्यात्मिक एवं वासंतिक ऊर्जा से भर दिया। हारमोनियम पर डॉ.प्रकाश चमोली तथा ढोलक पर वीरेन्द्र रतूड़ी बिट्टू भाई की सधी हुई संगत ने प्रस्तुतियों को संगीतमय ऊंचाइयों तक पहुंचाया और श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा ने गढ़वाली लोकभाषा के मधुर गीतों के माध्यम से वसंत ऋतु का आत्मीय स्वागत किया। वहीं कवयित्री साईनी कृष्ण उनियाल ने अपनी सशक्त एवं भावप्रवण कविता के माध्यम से वसंत की सौंदर्यपूर्ण महिमा का मनोहारी चित्रण प्रस्तुत किया। लोक रंगमंचीय कलाकार अंकित रावत ने लोकगायन द्वारा ऋतु परिवर्तन के उल्लास को जन-जन तक पहुंचाया। प्रसिद्ध कवि जय कृष्ण पैन्यूली की कविताओं ने कार्यक्रम को विशेष साहित्यिक गरिमा प्रदान की। इसके अतिरिक्त माधुरी नैथानी,अनीता नौडियाल,कौशल्या नैथानी एवं मीनाक्षी चमोली ने वसंत स्वागतार्थ एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर प्रोफेसर आर.एन.गैरोला ने हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् की अठारह वर्षों की दीर्घ साहित्यिक यात्रा एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए संस्था के सांस्कृतिक योगदान को विस्तार से रेखांकित किया। कृष्णानंद मैठाणी ने स्वरचित कविताओं का सस्वर पाठ किया,वहीं बाल कवि प्रद्युम्न उनियाल ने शाइनी उनियाल द्वारा रचित कविता का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की। नीरज नैथानी के वसंतमयी काव्यपाठ ने आयोजन को और अधिक भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की। कार्यक्रम में अनिल स्वामी थपलियाल,श्रीकृष्ण उनियाल,राजेन्द्र प्रसाद कपरुवाण,जसपाल सिंह गुंसाई,डॉ.प्रदीप अणथ्वाल,परिक्षित उनियाल,प्रमोद उनियाल सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों,कलाकारों एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समापन अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को समर्पित गीत एवं राष्ट्रीय गान का समवेत स्वर में गायन किया गया,जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत हो उठा। आयोजन के उपरांत मीठा पीला भात,बेसन लड्डू,गुलाब जामुन,रसगुल्ले सहित पारंपरिक मिष्ठानों के साथ सभी उपस्थितजनों को वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की गईं। यह आयोजन साहित्य,संस्कृति,लोकपरंपरा और सामाजिक सौहार्द का सजीव उदाहरण बनकर उपस्थित जनसमुदाय के स्मृति-पटल पर अमिट छाप छोड़ गया।

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