
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की पर्वतीय भूमि पर बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में नंदा गौरा योजना जनपद पौड़ी गढ़वाल में एक सशक्त सामाजिक परिवर्तन की मिसाल बनकर उभरी है। यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं,बल्कि बालिका जन्म से लेकर उच्च शिक्षा,आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन तक एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रही है। पहाड़ की बेटियां आज इस योजना के माध्यम से अपने सपनों को पंख देती नजर आ रही हैं,वहीं हजारों परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संबल मिल रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल ने बताया कि नंदा गौरा योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बालिका के जीवन की शुरुआत से ही उसके सशक्तिकरण की नींव रखती है। योजना के प्रथम चरण के तहत बालिका के जन्म के समय आर्थिक सहायता प्रदान कर संस्थागत प्रसव को बढ़ावा,मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी तथा बालिका जन्म के प्रति सकारात्मक सामाजिक सोच विकसित की जा रही है। इसी क्रम में चालू वित्तीय वर्ष में 227 नवजात बालिकाओं को प्रति बालिका 11 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई है,जिस पर 24 लाख 25 हजार रुपये व्यय हुए। इस सहायता ने न केवल आर्थिक राहत दी,बल्कि बेटियों को बोझ समझने वाली मानसिकता को बदलने में भी अहम भूमिका निभाई है। योजना के द्वितीय चरण में शिक्षा को केंद्र में रखा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनपद पौड़ी गढ़वाल की 1990 इंटरमीडिएट उत्तीर्ण बालिकाओं को प्रति बालिका 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। इसके अंतर्गत 10 करोड़ 14 लाख 90 हजार रुपये की धनराशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई,जिससे उच्च शिक्षा,प्रतियोगी परीक्षाओं एवं कैरियर निर्माण को ठोस आधार मिला है। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2021 से 2026 के बीच नंदा गौरा योजना ने जनपद पौड़ी गढ़वाल में व्यापक प्रभाव छोड़ा है। इस अवधि में प्रथम चरण में 2207 बालिकाएं,जबकि द्वितीय चरण में 12,874 बालिकाएं लाभान्वित हुईं। इस प्रकार कुल 15,081 बालिकाओं को योजना का प्रत्यक्ष लाभ मिला,जो इस योजना की व्यापक स्वीकार्यता और प्रभावशीलता को दर्शाता है। वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021-22 में 4278,2022-23 में 3251,2023-24 में 3294,2024-25 में 2041 तथा 2025-26 में 2217 बालिकाएं योजना से जुड़ीं। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि नंदा गौरा योजना जनपद में बालिका सशक्तिकरण की एक सतत और मजबूत श्रृंखला बन चुकी है। देवेंद्र थपलियाल ने बताया कि योजना का लाभ पूर्ण पारदर्शिता के साथ डीबीटी के माध्यम से दिया जा रहा है,जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना नहीं रहती। उन्होंने कहा कि नंदा गौरा योजना केवल धनराशि नहीं,बल्कि बेटियों के आत्मविश्वास,शिक्षा और आत्मनिर्भर भविष्य में किया गया निवेश है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि कोई भी पात्र बालिका इस योजना से वंचित न रहे,और प्रत्येक बेटी को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। निस्संदेह,नंदा गौरा योजना आज पौड़ी की बेटियों के लिए उम्मीद,सम्मान और आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुकी है-एक ऐसी पहल,जो समाज को सशक्त बनाने की दिशा में दूरगामी प्रभाव छोड़ रही है।