
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी जनपद के खाण्डयूसैंण स्थित जिला कारागार में जेल दिवस का आयोजन सादगी,अनुशासन और सकारात्मक वातावरण के बीच किया गया। कार्यक्रम जेल अधीक्षक कौशल कुमार की उपस्थिति में संपन्न हुआ,जिसमें कारागार को केवल दंड का नहीं,बल्कि सुधार,आत्मचिंतन और नए जीवन की शुरुआत का केंद्र बनाने का सशक्त संदेश दिया गया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक कौशल कुमार ने कहा कि जेल दिवस महज एक औपचारिक आयोजन नहीं,बल्कि बंदियों के लिए आत्ममंथन,सुधार और नए संकल्प का अवसर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कारागार की अवधारणा को दंडात्मक दृष्टिकोण से निकालकर सुधार,आत्मबोध और पुनर्वास की दिशा में ले जाना समय की आवश्यकता है और जेल दिवस मनाने का यही वास्तविक उद्देश्य है। अधीक्षक ने भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि बंदियों को रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनाने के लिए कारागार परिसर में बेकरी यूनिट एवं लॉन्ड्री (धुलाई) यूनिट की स्थापना प्रस्तावित की जाएगी। इन इकाइयों के माध्यम से बंदियों को व्यावहारिक कौशल प्रदान किया जाएगा,जिससे वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर स्वरोजगार एवं सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर हो सकें। कार्यक्रम के दौरान बंदियों के पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखते हुए विभिन्न योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। जेल दिवस के अवसर पर बंदियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी गई,जिसमें महिला बंदियों ने गीतों के माध्यम से अपनी प्रतिभा और भावनाओं को अभिव्यक्त किया,जिसने उपस्थित जनों को भावुक कर दिया। इसके साथ ही बंदियों के बीच खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया गया। कैरम प्रतियोगिता में लोकेंद्र थापा एवं रवि,लूडो में पारितोष कुमार एवं मोहम्मद इरफान,जबकि शतरंज प्रतियोगिता में अजय उर्फ अज्जू ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त वॉलीबॉल एवं रस्साकशी प्रतियोगिताओं में बंदियों ने समूहों में उत्साहपूर्वक सहभागिता कर खेल भावना का परिचय दिया। प्रतियोगिताओं में विजयी बंदियों को उनके दैनिक उपयोग की सामग्री पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई,जिसमें प्रथम पुरस्कार के रूप में बाल्टी,द्वितीय पुरस्कार टिफिन तथा तृतीय पुरस्कार पानी की बोतल शामिल रही। कार्यक्रम के अंतर्गत एक संवेदनशील और मानवीय पहल के रूप में लेटर टू फैमिली अभियान भी चलाया गया। इस अभियान के तहत उन बंदियों ने अपने परिजनों को पत्र लिखे,जिनकी नियमित मुलाकात नहीं हो पाती है। इस पहल का उद्देश्य बंदियों को भावनात्मक संबल प्रदान करना तथा उनके पारिवारिक संबंधों को सशक्त बनाना रहा। जेल दिवस का समापन इस संदेश के साथ किया गया कि सुधार की राह पर बढ़ता प्रत्येक कदम,बंदियों के भविष्य और समाज की सुरक्षा-दोनों को मजबूत करता है।