मुख्य नियंता बोर्ड का गठन-शिक्षकों की मजबूत टीम को सौंपी जिम्मेदारी
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में शैक्षणिक वातावरण को अनुशासित,सुरक्षित एवं मर्यादित बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज 29 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मुख्य नियंता बोर्ड (Chief Proctor Board) का विधिवत गठन किया गया। गुरुवार को विश्वविद्यालय के कुलसचिव अनीस-उज-जमान द्वारा कुलपति के अनुमोदन के उपरांत मुख्य नियंता बोर्ड की टीम घोषित की गई। बोर्ड का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन,छात्र-छात्राओं की सुरक्षा तथा शैक्षणिक गरिमा को बनाए रखना है। अंग्रेजी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो.दीपक कुमार को विश्वविद्यालय का मुख्य नियंता नियुक्त किया गया है। वहीं बायोटेक्नोलॉजी विभाग की प्रो.ममता आर्य एवं एमबीए विभाग के डॉ.सुरेंद्र मीणा को उप नियंता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभिन्न विभागों के अनुभवी शिक्षक बने सहायक नियंता विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभिन्न संकायों के अनुभवी एवं जिम्मेदार शिक्षकों को सहायक नियंता नियुक्त किया है,जिनमें अर्थशास्त्र विभाग से हिरामण रॉय,उद्यानिकी विभाग से डॉ.डी.के.राणा,जैव-रसायन विभाग से डॉ.मनीषा निगम,भौतिकी विभाग से डॉ.आलोक सागर गौतम,शारीरिक शिक्षा विभाग से डॉ.हीरालाल यादव,रसायन विज्ञान विभाग से जितेंद्र कुमार,माइक्रोबायोलॉजी विभाग से डॉ.विनित मौर्य,कम्प्यूटर साइंस विभाग से डॉ.ओम प्रकाश,अंग्रेजी विभाग से डॉ.नितेश बौठियाल,हिंदी विभाग से अनुप सेमवाल,शिक्षा विभाग से डॉ.पुनीत वालिया,समाजशास्त्र विभाग से डॉ.दिनेश चौधरी,एमएसडब्ल्यू विभाग से डॉ.रितु मिश्रा,कॉमर्स विभाग से डॉ.कमल आजाद,बी.एलएलबी से डॉ.गांधी सिंह,दर्शनशास्त्र विभाग से डॉ.कविता भट्ट,अर्थशास्त्र विभाग से डॉ.रुक्मणी,भूगोल विभाग से डॉ.धीरज कुमार,उद्यानिकी विभाग से डॉ.तेजपाल सिंह बिष्ट को सहायक नियंता नियुक्त किया गया है। अनुशासन और सुरक्षित परिसर पर विशेष जोर विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस सुदृढ़ टीम के गठन से विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासनात्मक व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी। साथ ही छात्र-छात्राओं को सुरक्षित,शांतिपूर्ण और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा। मुख्य नियंता बोर्ड का यह गठन विश्वविद्यालय की अकादमिक गरिमा एवं प्रशासनिक मजबूती की दिशा में एक सराहनीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।