
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी जनपद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत विभिन्न पदों पर कार्यरत विजिलैंड आऊटसोर्स कंपनी के कर्मचारियों को बीते तीन माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। लगातार मानदेय न मिलने के कारण कर्मचारियों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है,जिससे उनके परिवारों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी द्वारा मानदेय भुगतान में न केवल अनावश्यक देरी की जा रही है,बल्कि हर माह उनके वेतन से विभिन्न मदों में कटौती भी की जा रही है। सबसे गंभीर मामला तब सामने आया जब यह तथ्य उजागर हुआ कि कंपनी ने कर्मचारियों के मानदेय से ईपीएफ (भविष्य निधि) की कटौती तो की,परंतु उक्त राशि कर्मचारियों के पीएफ खातों में जमा ही नहीं कराई गई। यह न केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन है,बल्कि कर्मचारियों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ भी है। गौरतलब है कि एनएचएम के अंतर्गत आऊटसोर्स माध्यम से डाटा एंट्री ऑपरेटर,ब्लॉक लेखा प्रबंधक,एएनएम,फार्मासिस्ट,आयुर्वेदिक चिकित्सक,आरकेएसके काउंसलर सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं,जो स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाते हैं। इसके बावजूद इन्हीं कर्मचारियों के साथ इस प्रकार की लापरवाही बरती जा रही है। कंपनी और विभाग के बीच हुए अनुबंध के अनुसार,आऊटसोर्स कंपनी को पहले कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान करना होता है,जिसके पश्चात संबंधित बिल विभाग को प्रस्तुत किए जाते हैं और फिर विभाग द्वारा कंपनी को धनराशि का भुगतान किया जाता है। किंतु आरोप है कि कंपनी इस अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं कर रही है और कर्मचारियों को भुगतान किए बिना ही विभागीय प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। इसके अतिरिक्त,मातृत्व अवकाश पर गई महिला कर्मचारियों को भी अवकाश अवधि का मानदेय नहीं दिया गया है,जबकि उत्तराखंड राज्य में आऊटसोर्स महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश के दौरान मानदेय दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान है। यह स्थिति महिला कर्मचारियों के अधिकारों का सीधा हनन है। पीड़ित कर्मचारियों ने मांग की है कि शीघ्र ही बकाया मानदेय का भुगतान कराया जाए,ईपीएफ की कटी हुई राशि तत्काल उनके खातों में जमा की जाए तथा संबंधित आऊटसोर्स कंपनी के विरुद्ध जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ,तो कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे।