
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड सरकार द्वारा स्थापित विद्या समीक्षा केन्द्र प्रदेश की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक,पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है। तकनीक और डेटा विश्लेषण के सशक्त उपयोग से यह केन्द्र न केवल छात्रों की अधिगम प्रगति पर सतत निगरानी रख रहा है,बल्कि शिक्षकों के प्रशिक्षण,उपस्थिति,संसाधन प्रबंधन और विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी अहम भूमिका निभा रहा है। शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में नई शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के अनुरूप स्थापित विद्या समीक्षा केन्द्र,शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल गवर्नेंस का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। अधिकारियों के अनुसार इस केन्द्र के माध्यम से शिक्षा से जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण पहलू को डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली से जोड़ा गया है,जिससे गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार देखने को मिल रहा है। विद्या समीक्षा केन्द्र के अंतर्गत संचालित सक्षम कार्यक्रम के जरिए छात्रों की साप्ताहिक अधिगम प्रगति की निरंतर समीक्षा की जा रही है। विषयवार क्विज,मूल्यांकन और उपचारात्मक शिक्षण सामग्री के माध्यम से कमजोर छात्रों की पहचान कर उन्हें समय रहते आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। वहीं मेरी उपस्थिति चैटबॉट के माध्यम से विद्यार्थियों की रीयल-टाइम उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इससे लगातार अनुपस्थित रहने वाले छात्रों की शीघ्र पहचान संभव हो पाई है,जिसके परिणामस्वरूप समय पर हस्तक्षेप कर ड्रॉपआउट दर को कम करने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। शिक्षकों की कार्यक्षमता और शिक्षण गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए शिक्षक सहायक चैटबॉट को प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसके माध्यम से शिक्षकों को पाठ योजनाएं,वर्कशीट,शिक्षण वीडियो और अन्य शैक्षणिक संसाधन सहजता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त ई-सृजन प्लेटफार्म पर शिक्षकों को तकनीकी एवं विषयगत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब तक प्रदेश के लगभग 92 प्रतिशत शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण पूर्ण किया जाना,राज्य में शिक्षक क्षमता निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। साथ ही सीआरपी/बीआरपी द्वारा की जा रही ऑन-साइट मेंटरिंग की निगरानी भी विद्या समीक्षा केन्द्र से की जा रही है। अभिभावकों के लिए जिज्ञासा चैटबॉट बना भरोसेमंद माध्यम अभिभावकों को विभागीय योजनाओं,छात्र सुविधाओं और शैक्षणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिज्ञासा चैटबॉट की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही आईएफए एवं एनडीडी टैबलेट वितरण,एप्टीट्यूड टेस्ट अंकों का डिजिटलीकरण तथा यू-डाइस प्लस आधारित विश्लेषण जैसी पहलों से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गति आई है। विद्या समीक्षा केन्द्र के माध्यम से मूल्यांकन प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। फरवरी 2026 से ग्रेड 4 से 9 के लिए पहल डायग्नोस्टिक असेसमेंट
ग्रेड 1 एवं 2 के लिए निपुण एंडलाइन असेसमेंट में ओसीआर तकनीक के जरिए उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग की जाएगी। शिक्षक ऑनलाइन मूल्यांकन कर सकेंगे, जिससे समय की बचत होगी और 2 से 3 दिनों के भीतर मूल्यांकन रिपोर्ट उपलब्ध हो सकेगी। निजी और सहायता प्राप्त विद्यालय भी होंगे शामिल प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को समान रूप से सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निजी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों को भी विद्या समीक्षा केन्द्र के प्लेटफार्म से जोड़ा जा रहा है,ताकि प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। विद्या समीक्षा केन्द्र प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य के अनुरूप ढालने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। तकनीक और डेटा के माध्यम से अब छात्रों की सीखने की प्रक्रिया पर सतत निगरानी संभव हो रही है,वहीं शिक्षकों को आवश्यक संसाधन और प्रशिक्षण समय पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी,जवाबदेह और प्रभावी बन रही है।