
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जहां सपनों की राह कठिन हो और संसाधन सीमित,वहीं सच्ची प्रतिभा अपनी पहचान खुद गढ़ती है। देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ों से निकलकर छोटे पर्दे की सबसे लोकप्रिय दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं-लेकिन पौड़ी जिले की बेटी आरुषि तड़ियाल ने यह कर दिखाया है। थली गांव की संकरी पगडंडियों से शुरू हुआ उनका सफर आज देश के चर्चित धारावाहिक तारक मेहता का उल्टा चश्मा तक पहुंच चुका है,जहां उनका अभिनय दर्शकों के दिलों में जगह बना रहा है। हाल ही में आरुषि ने तारक मेहता का उल्टा चश्मा में तारक मेहता के बॉस मिस्टर मेहता की सचिव की भूमिका निभाकर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यालय से जुड़े दृश्यों में ताजगी और हास्य का नया रंग जोड़ने वाली उनकी भूमिका को दर्शकों की सराहना मिल रही है। कम समय में ही उनका सहज अभिनय,आत्मविश्वास और संवाद-शैली चर्चा का विषय बन गई है। शिक्षा से अभिनय तक-मेहनत का अनुशासित सफर आरुषि ने सेंट थॉमस स्कूल,पौड़ी से हाईस्कूल तथा दून इंटरनेशनल स्कूल से इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद मनोविज्ञान में परास्नातक की पढ़ाई पूरी कर उन्होंने अभिनय को करियर के रूप में चुना। उनके पिता ज्ञान सिंह तड़ियाल (सेवानिवृत्त ग्रामोद्योग अधिकारी हरिद्वार) और माता कुसुम तड़ियाल (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी,जिलाधिकारी कार्यालय पौड़ी) ने हर मोड़ पर बेटी का मनोबल बढ़ाया जो उनकी सफलता की मजबूत नींव बना। स्कूल मंच से कैमरे तक स्कूल जीवन में नृत्य और गायन से शुरू हुई कला-यात्रा ने मंचीय आत्मविश्वास दिया। वर्ष 2021 में मुंबई में कदम रखते ही आरुषि ने धारावाहिक बड़े अच्छे लगते हैं-दो से अभिनय की औपचारिक शुरुआत की। इसके बाद बरसातें सहित अन्य टीवी शो,वेब सीरीज़,फिल्मों और विज्ञापनों में काम कर उन्होंने अपने कौशल को निखारा,और अब देश के सबसे लोकप्रिय हास्य धारावाहिक में पहचान बनाई है। आरुषि का कहना तारक मेहता का उल्टा चश्मा जैसे ऐतिहासिक धारावाहिक का हिस्सा बनना मेरे लिए सीख और सम्मान दोनों है। वरिष्ठ कलाकारों के साथ काम करना मेरे अभिनय को और समृद्ध कर रहा है। आरुषि तड़ियाल की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं,बल्कि पूरे पौड़ी जिले और उत्तराखंड के लिए गौरव है। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रतिभा स्थान नहीं देखती वह अवसर बनाती है। उनकी सफलता पहाड़ की बेटियों और युवाओं के लिए स्पष्ट संदेश है कि मेहनत,धैर्य और निरंतर अभ्यास से सपने साकार होते हैं। गांव की पगडंडी से कैमरे की रोशनी तक पहुंची आरुषि आज नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं और यह यात्रा अभी जारी है।