उत्तराखंड बोर्ड परिक्षा 2026 सफलता का सूत्र-अनुशासन,रणनीति और आत्मविश्वास

राज्यपाल व मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक डॉ.अखिल चन्द्र चमोला ने विद्यार्थियों को दिए परीक्षा के विजय मंत्र हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बोर्ड परीक्षा केवल ज्ञान की नहीं,बल्कि संयम,योजना और आत्मविश्वास

📘 इन्हें भी पढ़ें

राज्यपाल व मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक डॉ.अखिल चन्द्र चमोला ने विद्यार्थियों को दिए परीक्षा के विजय मंत्र

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बोर्ड परीक्षा केवल ज्ञान की नहीं,बल्कि संयम,योजना और आत्मविश्वास की भी कसौटी होती है। उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षाएं 23 फरवरी तथा इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 21 फरवरी से प्रारंभ होने जा रही हैं। ऐसे निर्णायक समय में विद्यार्थियों को सही दिशा और सटीक मार्गदर्शन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। इसी क्रम में राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित,स्वर्ण पदक विजेता तथा वरिष्ठ शिक्षक डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला (राजकीय इंटर कॉलेज सुमाड़ी) ने बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए सफलता के व्यावहारिक और प्रभावी सूत्र साझा किए हैं। उनके अनुसार,अंतिम समय की तैयारी केवल कठिन परिश्रम नहीं,बल्कि सुविचारित रणनीति और मानसिक संतुलन की मांग करती है। डॉ.चमोला ने कहा कि विद्यार्थियों को पूरे पाठ्यक्रम को एक साथ पढ़ने के बजाय अध्यायवार अंकों के महत्व के अनुसार तैयारी करनी चाहिए। जिन अध्यायों से अधिक अंक पूछे जाते हैं,उन्हें प्राथमिकता दें। उन्होंने बोर्ड द्वारा जारी परीक्षा रूपरेखा (ब्लूप्रिंट) को ध्यानपूर्वक समझने पर बल दिया,जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वस्तुनिष्ठ,लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न किन अध्यायों से पूछे जाएंगे। पुनरावृत्ति ही स्थायी स्मृति की कुंजी केवल पढ़ना पर्याप्त नहीं,बल्कि पढ़े हुए विषय को दोहराना और स्वयं से प्रश्न पूछना आवश्यक है। डॉ.चमोला के अनुसार किसी भी विषय को पढ़ने के 24 घंटे के भीतर और फिर 7 दिन बाद पुनरावृत्ति करने से वह विषय दीर्घकालीन स्मृति में सुरक्षित हो जाता है। विद्यार्थियों को पढ़े हुए विषय को किसी मित्र या परिवार के सदस्य को समझाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा में उत्तर पुस्तिका ही परीक्षक से संवाद का माध्यम होती है। महत्वपूर्ण शब्दों को रेखांकित करना,बिंदुवार उत्तर लिखना,विषयानुसार चित्र,तालिका और प्रवाह-चार्ट का प्रयोग करना उत्तर को प्रभावशाली बनाता है। अनावश्यक विस्तार से बचते हुए प्रश्नानुसार सटीक उत्तर लिखना अधिक अंक दिलाने में सहायक होता है। डॉ.चमोला ने विद्यार्थियों को घर पर ही परीक्षा जैसा वातावरण बनाकर तीन घंटे का अभ्यास करने की सलाह दी। प्रत्येक खंड के लिए समय पहले से निर्धारित कर लेना चाहिए और अंतिम 15 मिनट केवल उत्तरों की समीक्षा के लिए सुरक्षित रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि अत्यधिक तनाव,मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग और नींद की कमी परीक्षा परिणामों को प्रभावित कर सकती है। विद्यार्थियों को अध्ययन के बीच छोटे-छोटे विश्राम लेने,हल्का व्यायाम करने और मोबाइल व सोशल मीडिया से दूरी बनाने की सलाह दी गई। कठिन विषयों से डर नहीं,मित्रता करें गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रटने के बजाय सूत्रों और अवधारणाओं के पीछे का तर्क समझना आवश्यक है। महत्वपूर्ण सूत्र,प्रमेय और तिथियों के चार्ट बनाकर अध्ययन कक्ष में लगाने से स्मरण शक्ति मजबूत होती है। डॉ.चमोला ने अभिभावकों से कहा कि परीक्षा के समय बच्चों को आलोचना नहीं,बल्कि सहयोग और सकारात्मक वातावरण की आवश्यकता होती है। उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों को सराहना बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है। परीक्षार्थियों के लिए प्रेरक संदेश डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला ने कहा प्रिय विद्यार्थियों आपकी मेहनत का प्रत्येक क्षण आपके उज्ज्वल भविष्य की नींव है। आत्मविश्वास के साथ परीक्षा को उत्सव की तरह लें। सफलता निश्चित रूप से आपके कदम चूमेगी।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...