ज्योतिष की गरिमा और आध्यात्मिक स्वरूप के संरक्षण पर मंथन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। ज्योतिष विद्या के मूल आध्यात्मिक स्वरूप,वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उपयोगिता को संरक्षित एवं सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हिमालय ज्योतिष संरक्षण एवं विकास परिषद के तत्वावधान में

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। ज्योतिष विद्या के मूल आध्यात्मिक स्वरूप,वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उपयोगिता को संरक्षित एवं सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हिमालय ज्योतिष संरक्षण एवं विकास परिषद के तत्वावधान में डांग स्थित परिषद कार्यालय में बुधवार सायं एक महत्वपूर्ण सदस्यता कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परिषद में दो नए सदस्यों में डॉ.दीपक कुमार द्विवेदी एवं डॉ.प्रदीप अणथ्वाल को विधिवत सदस्यता प्रदान कर उनका स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान ज्योतिष विद्या की वर्तमान स्थिति,उसके मूल सिद्धांतों तथा समाज में उसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से टीवी चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रसारित किए जा रहे अनर्गल,भ्रामक और चमत्कारी उपायों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई,जो आमजन को भ्रमित कर ज्योतिष जैसी प्राचीन और गंभीर विद्या की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। परिषद के अध्यक्ष आचार्य भास्करानंद अणथ्वाल ने अपने संबोधन में कहा कि ज्योतिष केवल तंत्र-मंत्र या तात्कालिक समाधान का माध्यम नहीं है,बल्कि यह एक गहन आध्यात्मिक और शास्त्रीय विद्या है,जिसका उद्देश्य मानव जीवन को दिशा देना,आत्मचिंतन को बढ़ावा देना और समाज में संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि आज व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के दौर में कुछ लोग ज्योतिष के नाम पर जनता को भ्रमित कर रहे हैं,जिससे इस विद्या की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। ऐसी स्थिति में परिषद का दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वह ज्योतिष के शुद्ध,शास्त्र-सम्मत और आध्यात्मिक स्वरूप को संरक्षित रखे। नव-नियुक्त सदस्यों डॉ.दीपक कुमार द्विवेदी एवं डॉ.प्रदीप अणथ्वाल ने परिषद से जुड़ने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वे ज्योतिष विद्या के वैज्ञानिक,आध्यात्मिक एवं नैतिक पक्ष को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे तथा भ्रामक प्रचार के विरुद्ध जागरूकता अभियान में परिषद का सहयोग करेंगे। विचार गोष्ठी में इस बात पर भी सहमति बनी कि भविष्य में ज्योतिष विषय पर संगोष्ठियां,प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं जन-जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे,जिससे समाज को ज्योतिष के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराया जा सके और इस प्राचीन विद्या की प्रतिष्ठा को अक्षुण्ण रखा जा सके। कार्यक्रम के अंत में परिषद के अध्यक्ष आचार्य भास्करानंद अणथ्वाल एवं उपस्थित सदस्यों ने नवागंतुक सदस्यों का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की कि उनके जुड़ने से परिषद की गतिविधियों को नई ऊर्जा और दिशा मिलेगी।

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